img

Up Kiran,Digital Desk: उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा अब मुख्यधारा के पाठ्यक्रम के साथ जुड़ेगी। राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद 452 मदरसों के हजारों बच्चे अब उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई करेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इनसे निकलने वाले छात्रों के शैक्षिक प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी में मान्य होंगे।

मदरसों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य सुरक्षित
प्रदेश के मदरसों से अब तक 43,186 से अधिक छात्रों ने मुंशी, मौलवी, आलिम, अरबी फारसी, कामिल और फाजिल की पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, पहले मुंशी, मौलवी और आलिम के प्रमाण पत्र उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं के बराबर नहीं माने जाते थे। इसका सीधा असर यह था कि ये छात्र सरकारी नौकरी या अन्य शैक्षिक अवसरों का फायदा नहीं उठा पा रहे थे। इस बदलाव से उनके भविष्य के रास्ते अब स्पष्ट और सुरक्षित हो जाएंगे।

मदरसा बोर्ड की लंबी कोशिशें रंग लाईं
2016 में बने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने लंबे समय तक अपने प्रमाण पत्रों को राज्य बोर्ड के समकक्ष मान्यता दिलाने के प्रयास किए। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि बोर्ड की उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता के बाद अब छात्रों के प्रमाण पत्र पूरी तरह से मान्य होंगे और वे इन्हें सरकारी तथा शैक्षिक अवसरों में इस्तेमाल कर सकेंगे।