Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को, उन्होंने दो ग्राम पंचायतों के नाम बदलने का निर्णय लिया, जिससे प्रदेश में कई राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। हरदोई और फिरोजाबाद जिले की ये ग्राम पंचायतें अब नए नामों से जानी जाएंगी। यह कदम राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किया गया है।
हरदोई और फिरोजाबाद में ग्राम पंचायतों के नाम में बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वीकृति से हरदोई और फिरोजाबाद जिले की दो ग्राम पंचायतों के नामों में बदलाव किया गया है। इसके तहत, फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद तहसील के ग्राम पंचायत 'उरमुरा किरार' का नाम बदलकर 'हरिनगर' कर दिया गया है। वहीं, हरदोई जिले के विकास खंड भरावन स्थित ग्राम पंचायत 'हाजीपुर' का नाम अब 'सियारामपुर' होगा।
नाम परिवर्तन पर पहले से हो चुकी थी चर्चा
हरदोई जिले के 'हाजीपुर' का नाम बदलने का प्रस्ताव पिछले साल अप्रैल में रखा गया था। इस प्रस्ताव को जिला पंचायत की बैठक में मंजूरी मिल गई थी, जहाँ सर्वसम्मति से इसे स्वीकृत किया गया था। विशेष रूप से, भरावन के प्रधान गुज्जो देवी ने यह प्रस्ताव इसलिए रखा था क्योंकि गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नहीं थे, और इस नाम में कोई सांस्कृतिक या धार्मिक संदर्भ जुड़ा हुआ नहीं था। इसके अलावा, म्यूनिसिपल काउंसिल सदस्य अशोक अग्रवाल ने भी इसे ग्रामवासियों की मांग के रूप में पेश किया था, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 1,118 है।
हरदोई जिले का नाम भी बदलने की योजना
इसके अलावा, हरदोई जिले के नाम को लेकर भी एक प्रस्ताव सामने आया था। एक महीने पहले, जिला अधिकारी कार्यालय ने जिले का नाम बदलकर 'प्रहलाद नगरी' करने की बात की थी। इस प्रस्ताव के समर्थन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों से सुझाव मांगे गए थे। यह पहल शिवम द्विवेदी की अगुवाई में प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति द्वारा शुरू की गई थी, और इस कदम को लेकर जिले के विभिन्न नेताओं से अभिमत भी लिए गए थे।
यूपी सरकार की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा
सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को पुनः स्थापित करने में सक्रिय है। लखनऊ में प्रवेश करने वाले प्रमुख रास्तों पर सात भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। ये द्वार राज्य की समृद्ध संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक होंगे। इन द्वारों के निर्माण से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त किया जाएगा।
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