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केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने हाल ही में नांदेड़ में अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिसके बाद मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं में हलचल मच गई है। यह कदम बीकेटीसी (बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) के नियमों के खिलाफ माना जा रहा है, क्योंकि इस संबंध में समिति को पहले कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी।

बीकेटीसी की प्रक्रिया पर सवाल

केदारनाथ धाम में रावल पद के चयन की प्रक्रिया काफी सुव्यवस्थित है और इसके लिए बीकेटीसी को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। साल 2000 में भीमाशंकर लिंग को इस पद पर नियुक्त किया गया था, जब पूर्व रावल सिद्धेश्वर लिंग ने स्वास्थ्य कारणों से पद से इस्तीफा दिया था। उनके बाद बीकेटीसी ने पूरी प्रक्रिया के बाद भीमाशंकर लिंग को रावल नियुक्त किया था, लेकिन इस बार बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के उत्तराधिकारी की घोषणा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

नांदेड़ में उत्तराधिकारी की घोषणा: नियमों का उल्लंघन?

बीकेटीसी के नियमों के तहत रावल पद पर किसी भी उत्तराधिकारी की घोषणा समिति की अनुमति के बिना करना उचित नहीं माना जाता। भीमाशंकर लिंग ने नांदेड़ में इस घोषणा के बाद यह भी नहीं बताया कि उन्होंने यह कदम किसकी अनुमति से उठाया। इसके साथ ही, रूप छड़ी को निजी आयोजन में भेजने का मामला भी विवादित हो गया है, क्योंकि इसके इस्तेमाल के लिए विशेष नियम और परंपराएं निर्धारित हैं, जो इस प्रकार के आयोजन में पालन नहीं की जातीं।

धार्मिक परंपराओं और नियमों की जटिलता

केदारनाथ और बदरीनाथ के धाम में रावल और नायब रावल के नियुक्ति का अधिकार बीकेटीसी को है। इस निर्णय पर न केवल धार्मिक परंपराएं प्रभाव डालती हैं, बल्कि यह सार्वजनिक विश्वास और मंदिर प्रशासन के कामकाज पर भी गहरा असर डालता है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस विवाद के बारे में बताया कि उन्हें अभी तक रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा उत्तराधिकारी घोषित करने की कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रावल का त्यागपत्र देने के बाद ही नए रावल का चयन बीकेटीसी के नियमों के अनुसार किया जाएगा।