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UP Kiran Digital Desk : हिंदू पंचांग में लगभग हर महीने के अपने व्रत और त्यौहार होते हैं। कुछ व्रत शांतिपूर्वक संपन्न हो जाते हैं, जबकि अन्य भक्तों के लिए गहन धार्मिक महत्व रखते हैं। प्रदोष व्रत भी ऐसा ही एक व्रत है, जो भगवान शिव के उपासकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

सामान्यतः, प्रदोष व्रत चंद्र माह में दो बार, एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में, दोनों बार त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। हालांकि, चंद्र चक्र में कभी-कभी थोड़ा बदलाव आ जाता है। मार्च 2026 ऐसा ही एक महीना है। इस व्रत का समय महीने में तीन बार है, जो इसे शिव भक्तों के लिए थोड़ा अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत सोमवार, 16 मार्च को रखा जाएगा। व्रत का समय त्रयोदशी तिथि के अनुसार निर्धारित होता है।

त्रयोदशी तिथि का समय

प्रारंभ: 16 मार्च 2026 को सुबह 9:41 बजे

समाप्ति तिथि: 17 मार्च 2026 को सुबह 9:24 बजे

चूंकि इस अवधि के दौरान 16 मार्च को शाम का प्रदोष काल पड़ता है, इसलिए भक्त उस दिन व्रत रखेंगे। त्रयोदशी सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव की पूजा में सोमवार का विशेष महत्व है, इसीलिए सोम प्रदोष को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत 2026 पूजा समय

दिन के कुछ निश्चित समय प्रार्थना और अनुष्ठानों के लिए आध्यात्मिक रूप से शुभ माने जाते हैं।

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:10 से 5:58 बजे तक

सुबह का शुभ समय: सुबह 5:34 से 6:46 बजे तक

प्रदोष काल पूजा समय: शाम 6:37 बजे से रात 8:44 बजे तक

भक्त आमतौर पर शाम के प्रदोष काल के दौरान शिव पूजा करते हैं, प्रार्थना करते हैं, दीपक जलाते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं।

प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सनातन धर्म से संबंधित ग्रंथों में प्रदोष काल को शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बताया गया है। इस व्रत से जुड़ी कुछ सामान्य मान्यताएं इस प्रकार हैं:

  • ऐसा माना जाता है कि यह वैवाहिक जीवन में शांति और सद्भाव लाता है।
  • भक्त परिवार और बच्चों से संबंधित आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं।
  • प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करने से अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का लाभ होता है।
  • शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

कई भक्तों के लिए, उपवास केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि महादेव को समर्पित चिंतन और भक्ति का क्षण भी है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान सामान्यतः सरल और भक्तिमय होते हैं। व्रत रखने वाले नीचे दिए गए सामान्य चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और भगवान शिव के समक्ष व्रत रखने का संकल्प लें।
  • घर के पूजा-स्थल को साफ करें और शाम की पूजा के लिए जगह तैयार करें।
  • प्रदोष काल के दौरान, शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और कच्चा गाय का दूध अर्पित करें।
  • “ओम नमः शिवाय” का जाप करें, शिव चालीसा का पाठ करें या प्रदोष व्रत कथा सुनें
  • घी के दीपक से आरती करें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें।
  • कई श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य भी करते हैं।

शिव भक्तों के लिए, सोम प्रदोष व्रत का पालन करना अक्सर आशीर्वाद प्राप्त करने, उपवास के माध्यम से अनुशासन का अभ्यास करने और प्रार्थना और भक्ति में समय बिताने के अवसर के रूप में देखा जाता है।