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Up kiran,Digital Desk : केंद्र सरकार ने पांच केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत कार्रवाई करने के अधिकार दे दिए हैं। अब ये अधिकारी ऐसे मामलों में कार्रवाई कर सकेंगे, जिनमें कैंसर, डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियों के इलाज को लेकर चमत्कारी गुणों या जादुई दावों वाले विज्ञापन शामिल हों।

कौन-कौन से केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं?

गृह मंत्रालय के हाल ही में जारी आदेश के अनुसार, यह अधिकार निम्नलिखित केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को दिया गया है:

जम्मू-कश्मीर

लक्षद्वीप

चंडीगढ़

दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव

पुडुचेरी

आदेश में कहा गया है कि ये अधिकारी राष्ट्रपति के नियंत्रण में रहते हुए और अगले आदेश तक राज्य सरकारों को प्राप्त शक्तियों का प्रयोग अपने क्षेत्रों में कर सकेंगे।

औषधि एवं जादुई उपचार अधिनियम क्या है?

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 का उद्देश्य भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना है। इसके तहत:

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित आयुष दवाओं के दावे भी शामिल हैं।

अधिकृत अधिकारी किसी भी विज्ञापन स्थल या परिसर में प्रवेश, तलाशी, रिकॉर्ड जांच और जब्ती की कार्रवाई कर सकते हैं।

अधिनियम कंपनियों को यह प्रतिबंधित करता है कि वे किसी दवा या औषधि को चमत्कारी इलाज के रूप में प्रचारित करें।

कौन सी बीमारियां अधिनियम के तहत शामिल हैं?

इस अधिनियम की निषिद्ध अनुसूची में कुल 54 बीमारियां और विकार शामिल हैं। इनमें मुख्य हैं:

डायबिटीज

मोटापा

कैंसर

कानून के अनुसार, इन बीमारियों के इलाज को लेकर किसी भी दवा या उपचार का भ्रामक प्रचार या विज्ञापन करना गैरकानूनी होगा।

क्यों है यह कदम जरूरी?

हाल के वर्षों में भ्रामक और झूठे विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। कई कंपनियां लोगों को चमत्कारी इलाज का वादा करती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। केंद्र सरकार ने इस कदम के जरिए सुरक्षित और प्रमाणित औषधियों के प्रचार को सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।