img

Up kiran,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) के रणक्षेत्र में समीकरण अब पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के 26वें दिन एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। खाड़ी देश का सबसे शक्तिशाली चेहरा, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), अब खुलकर ईरान के खिलाफ अमेरिका के पाले में खड़े हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि की है कि सऊदी अरब इस जंग में वाशिंगटन का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा खुलासा: 'प्रिंस एक योद्धा हैं'

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की भूमिका पर से पर्दा उठाया। जब उनसे पूछा गया कि क्या क्राउन प्रिंस अमेरिका को ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, तो ट्रंप ने दो टूक कहा, "हां, वह ऐसा कर रहे हैं। वह एक योद्धा हैं और वह हमारे साथ मिलकर इस लड़ाई को लड़ रहे हैं।" न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी प्रिंस का मानना है कि यह सैन्य अभियान मध्य पूर्व के भविष्य को फिर से लिखने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

सऊदी अरब ने क्यों बदला अपना रुख?

ईरान ने इस युद्ध के दौरान न केवल इजरायल और अमेरिका को चुनौती दी, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और खुद सऊदी अरब पर भी हमले किए। ईरान की इस आक्रामकता ने सऊदी अरब को रक्षात्मक से आक्रामक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में क्राउन प्रिंस ने ईरान के कट्टरपंथी शासन को जड़ से खत्म करने के अभियान का पुरजोर समर्थन किया है।

क्राउन प्रिंस की ट्रंप को सलाह: 'सरकार हटाना ही एकमात्र समाधान'

सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत में स्पष्ट किया है कि ईरान का वर्तमान शासन पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक खतरा है। उन्होंने तर्क दिया है कि इस खतरे को तब तक खत्म नहीं किया जा सकता जब तक तेहरान में सत्ता परिवर्तन न हो जाए। प्रिंस ने अमेरिका को सलाह दी है कि वे ईरान के खिलाफ इस निर्णायक युद्ध को जारी रखें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता का एक नया युग शुरू हो सके।