Up kiran,Digital Desk : साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स मई के अंतिम सप्ताह में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने वाले हैं। इस दौरे को भारत-साइप्रस संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भारत में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस व्रायोनाइड्स ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूती देगी।
अगले महीने भारत आएंगे साइप्रस के विदेश मंत्री
साइप्रस द्वारा यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने के अवसर पर पीटीआई से बातचीत में उच्चायुक्त व्रायोनाइड्स ने बताया कि अगले महीने साइप्रस के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आएंगे। इसके बाद मई में राष्ट्रपति निकोस की यात्रा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही उच्चस्तरीय बैठकों से दोनों देशों के बीच साझेदारी की गहराई स्पष्ट होती है।
पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा से मिली थी नई दिशा
उच्चायुक्त ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून 2025 में हुई साइप्रस यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच एक संयुक्त कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें अगले पांच वर्षों के लिए सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है।
पर्यटन से लेकर रक्षा तक सहयोग बढ़ाने पर जोर
इस संयुक्त कार्ययोजना में पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, डेस्टिनेशन वेडिंग, फिल्म उद्योग और रक्षा जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। साइप्रस ने 2026 की पहली छमाही के लिए यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभाली है, जिसमें स्वायत्तता को प्रमुख एजेंडा बनाया गया है।
IMEC को बताया रणनीतिक रूप से अहम
व्रायोनाइड्स ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने इसे भारत और यूरोप के बीच संपर्क और व्यापार को बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण भू-रणनीतिक पहल बताया।
वैश्विक घटनाक्रमों पर साइप्रस की नजर
उन्होंने बताया कि साइप्रस गाजा, यूक्रेन, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड समेत दुनिया के कई हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में साइप्रस इन चुनौतियों को गंभीरता से देख रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।




