Up Kiran, Digital Desk: 2024-25 के दौरान कई राज्यों में मुफ्त बिजली देने के बावजूद भारत की सरकारी और निजी बिजली कंपनियों ने 2700 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। यह आंकड़ा पहले के वर्षों के मुकाबले बड़ा सुधार दर्शाता है, जब कंपनियों को 25,553 करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ा था। विद्युत मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि इस सुधार के पीछे मुख्य रूप से सरकारी बिजली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन का हाथ है।
सरकारी कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन
विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में भारी कमी और उनके संचालन में सुधार ने इस वित्तीय सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान निजी वितरण कंपनियों ने भी मुनाफा कमाया लेकिन सरकारी कंपनियों के प्रदर्शन ने इन परिणामों को और अधिक मजबूती दी है। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में, इन कंपनियों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सुधारों का व्यापक असर
बिजली वितरण कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे कुछ प्रमुख सुधार हैं जिनका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, स्मार्ट मीटरों का तेजी से विस्तार और सब्सिडी के हिसाब-किताब में पारदर्शिता शामिल है। सरकार ने कई राज्यों में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है, लेकिन अगर इस संबंध में बजट में राशि का प्रावधान नहीं किया जाता, तो वितरण कंपनियों को इसका वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, वितरण कंपनियों के लिए समान नीति और वित्तीय प्रबंधन में सुधार के प्रयासों ने भी परिणामों को बेहतर किया है। कानूनी अनुबंधों के पालन और समय पर भुगतान से नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने में मदद मिली है, जिससे इन कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी हुई है।
तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसानों में कमी
एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि तकनीकी और वाणिज्यिक (AT&C) नुकसानों में भी कमी आई है। 2013-14 में जहां यह नुकसान 22.6% था, वह अब घटकर 2024-25 में 15% हो गया है। इसके अलावा, देर से भुगतान पर लगाए गए सरचार्ज जैसे सुधारों के कारण, जनरेटिंग कंपनियों को बकाया भुगतान में भी भारी कमी आई है। 2022 में बकाया राशि 1.4 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब घटकर जनवरी 2026 तक केवल 4,927 करोड़ रुपये रह गई है।
2022-23 का विशाल घाटा और भविष्य की दिशा
हालांकि, ये सुधार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 2022-23 में इन कंपनियों का कुल घाटा 6.8 लाख करोड़ रुपये था। PwC इंडिया के पार्टनर, संबितोष मोहपात्रा का मानना है कि कुछ राज्यों में वितरण कंपनियों का मुनाफे में लौटना महज एक अकाउंटिंग प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। बेहतर बिलिंग प्रक्रिया, सब्सिडी का बेहतर प्रबंधन और कुछ विशेष टैरिफ की नीति ने इस सुधार को संभव बनाया है। हालांकि, मोहपात्रा का कहना है कि इन कंपनियों को अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।
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