Up Kiran,Digitl Desk: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर दास ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के बाद एक ऐसा इशारा दिया है, जिससे आम लोगों और खासकर लोन लेने वालों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा है कि भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती की 'गुंजाइश' (Policy Space) मौजूद है. इसका सीधा मतलब है कि RBI ब्याज दरों को और कम कर सकता है, जिससे लोन और सस्ते हो सकते हैं.
'पॉलिसी स्पेस' का क्या है मतलब: सीधे शब्दों में कहें तो 'पॉलिसी स्पेस' का मतलब है कि RBI के पास अपनी आर्थिक नीतियों, जैसे ब्याज दरों को कम या ज़्यादा करने, के लिए काफ़ी 'रूम' या 'अवसर' है. यह तब होता है जब अर्थव्यवस्था में महंगाई (inflation) कंट्रोल में हो, विकास की गति ठीक-ठाक हो, और ग्लोबल इकोनॉमी भी ज़्यादा ख़तरनाक स्थिति में न हो. RBI गवर्नर का यह बयान इशारा करता है कि मौजूदा हालात RBI के पक्ष में हैं, जिससे वे अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरें कम करने जैसा कदम उठा सकते हैं.
अगर घटती हैं ब्याज दरें, तो क्या होगा?लोन होंगे सस्ते: सबसे सीधा असर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और बिज़नेस लोन पर पड़ेगा. EMI कम हो जाएगी, जिससे लोगों की ख़र्च करने की क्षमता बढ़ सकती है.
निवेश को बढ़ावा: कंपनियाँ आसानी से कर्ज़ लेकर अपना कारोबार बढ़ा सकती हैं, जिससे रोज़गार और आर्थिक विकास को मदद मिलेगी.
सावधानी: दूसरी ओर, FD (फिक्स्ड डिपॉज़िट) और दूसरी सेविंग्स पर मिलने वाला ब्याज भी थोड़ा कम हो सकता है, जिसका मतलब है कि बैंकों में पैसा जमा करने पर पहले से कम रिटर्न मिलेगा.
RBI का नज़रिया: ग्रोथ पर ज़ोर: RBI का मुख्य लक्ष्य महंगाई को काबू में रखते हुए अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बढ़ाना है. जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो लोग ज़्यादा ख़र्च करते हैं, कंपनियाँ ज़्यादा निवेश करती हैं, और कुल मिलाकर इकोनॉमी को बूस्ट मिलता है. गवर्नर का यह बयान इसी दिशा में एक संकेत माना जा रहा है.
फिलहाल, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ब्याज दरें कब और कितनी घटेंगी, लेकिन RBI गवर्नर का यह बयान निश्चित रूप से उम्मीद जगाने वाला है, ख़ासकर उन लोगों के लिए जो नया घर खरीदना चाहते हैं या अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं.
_1295105757_100x75.jpg)



