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Up kiran,Digital Desk : कूटनीति में न कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही स्थायी दोस्त, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है। कभी पाकिस्तान के 'कट्टर दोस्त' रहे और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत की खुलकर मुखालफत करने वाले अजरबैजान (Azerbaijan) ने अब भारत के साथ दोस्ती का हाथ मिलाया है। शुक्रवार को बाकू में हुई एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता के साथ ही दोनों देशों ने अपने बिगड़े हुए रिश्तों को 'रीसेट' करने की एक ऐतिहासिक और नई शुरुआत की है।

क्या था 'ऑपरेशन सिंदूर' और क्यों बिगड़े थे रिश्ते?

रिश्तों में खटास की जड़ें अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी हैं। उस हमले के जवाब में भारत ने 7 से 10 मई 2025 तक 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, जिसके तहत PoK और पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए गए थे। उस वक्त अजरबैजान और तुर्की ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए भारत की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी। इसके जवाब में भारत ने अजरबैजान की SCO सदस्यता का विरोध किया और भारतीय पर्यटकों ने भी इस देश का बहिष्कार कर दिया था।

ईरान युद्ध ने बदली बाजी: भारतीयों की मदद कर जीता दिल

अजरबैजान के इस यू-टर्न के पीछे मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच का भीषण तनाव एक बड़ी वजह बना है। दरअसल, ईरान में फंसे 200 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अजरबैजान ने अपना लैंड बॉर्डर खोलकर भारत की बड़ी मदद की। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बाकू यात्रा के दौरान इस मानवीय सहायता के लिए अजरबैजान का आभार जताया। संकट के समय दी गई इस मदद ने कूटनीतिक बर्फ पिघलाने में 'इग्निशन' का काम किया है।

व्यापार और सुरक्षा पर 'मेगा डील' की तैयारी

भारत और अजरबैजान के बीच 'विदेश कार्यालय परामर्श' के छठे दौर की बैठक में आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

ऊर्जा और व्यापार: तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग को नए सिरे से परिभाषित करना।

आतंकवाद पर वार: सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति।

तकनीक और फार्मा: भारतीय दवाओं और आईटी सेक्टर के लिए अजरबैजान के दरवाजे खुलना।

कनेक्टिविटी: अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) पर चर्चा।

आर्मेनिया के साथ संतुलन बनाना अजरबैजान की मजबूरी?

जानकारों का मानना है कि अजरबैजान को अब समझ आ गया है कि भारत को नजरअंदाज करना उसकी अर्थव्यवस्था के लिए भारी पड़ सकता है। भारत ने हाल के वर्षों में अजरबैजान के प्रतिद्वंद्वी आर्मेनिया (Armenia) को पिनाक रॉकेट सिस्टम और अन्य हथियार देकर अपनी सामरिक स्थिति मजबूत की है। अब अजरबैजान चाहता है कि वह भारत के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाए ताकि क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बना रहे। बाकू में हुई बैठक में अजरबैजान के उप विदेश मंत्री एलनुर मम्मादोव ने भी माना कि निरंतर संवाद ही विवादों का हल है।

अगली बैठक नई दिल्ली में: क्या पूरी तरह खत्म होगी कड़वाहट?

भारतीय राजदूत अभय कुमार की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। दोनों देशों ने तय किया है कि कूटनीतिक चर्चा का अगला दौर नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। भारत के लिए अजरबैजान के साथ संबंध सुधारना मध्य एशिया में अपनी पैठ मजबूत करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।