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Up kiran,Digital Desk : भारतीय रेलवे की नई पहचान बन चुकी 'वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस' ने हावड़ा-कामाख्या रूट पर सफलता की नई इबारत लिख दी है। लॉन्चिंग के महज 90 दिनों के भीतर ही इस ट्रेन ने यात्रियों के बीच अपनी ऐसी जगह बनाई है कि इसके ऑक्यूपेंसी आंकड़े 100 प्रतिशत को भी पार कर गए हैं। प्रीमियम नाइट ट्रेवल के मामले में यह ट्रेन अब उत्तर-पूर्व और बंगाल के यात्रियों की पहली पसंद बन गई है।

3 महीने में 119 फेरे और 1.21 लाख मुसाफिर

रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जनवरी 2026 को मालदा टाउन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद से इस ट्रेन ने अब तक 119 ट्रिप्स पूरी की हैं। इस दौरान करीब 1.21 लाख यात्रियों ने वंदे भारत स्लीपर की आधुनिक सुविधाओं का आनंद लिया। हावड़ा से कामाख्या के बीच चलने वाली इस सेमी हाई स्पीड ट्रेन ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि आरामदायक सफर का नया मानक भी स्थापित किया है।

आधुनिक तकनीक और वर्ल्ड क्लास सुविधाएं

बीईएमएल (BEML) और आईसीएफ (ICF) के साझा सहयोग से निर्मित इस ट्रेन में सुरक्षा और आराम का विशेष ध्यान रखा गया है। ट्रेन में कुल 16 आधुनिक कोच लगाए गए हैं:

एसी 3-टियर: 11 कोच

एसी 2-टियर: 4 कोच

एसी फर्स्ट क्लास: 1 कोच

इस ट्रेन का संचालन नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे जोन द्वारा किया जा रहा है। यात्रियों के बढ़ते भरोसे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉन्चिंग के बाद से ही इसमें 'नो रूम' (No Room) की स्थिति बनी हुई है।

हावड़ा-कामाख्या रूट: 13 स्टेशनों पर ठहराव

ट्रेन नंबर 27575/27576 हावड़ा से कामाख्या के बीच के सफर को बेहद सुगम बनाती है। यह ट्रेन रास्ते में बैंडेल, नवद्वीप धाम, कटवा, अजीमगंज, न्यू फरक्का, मालदा टाउन, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूच बिहार और रंगिया जैसे कुल 13 महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ती है।

समय सारिणी (Time Table):

गाड़ी संख्या 27575: हावड़ा से शाम 6:20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 8:20 बजे कामाख्या पहुंचती है।

गाड़ी संख्या 27576: कामाख्या से शाम 6:15 बजे चलकर अगले दिन सुबह 8:15 बजे हावड़ा पहुंचती है।

यात्रियों को क्यों भा रही है वंदे भारत स्लीपर?

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर की सफलता का मुख्य कारण इसकी रफ्तार और रात भर का सुविधाजनक सफर है। यात्री शाम को ट्रेन पकड़कर सुबह अपने गंतव्य पर पहुंच रहे हैं, जिससे उनका पूरा दिन बच जाता है। इसके अलावा ट्रेन के इंटीरियर, बेहतर लाइटिंग, क्लीन टॉयलेट्स और साइलेंट केबिन्स ने हवाई सफर जैसा अनुभव रेल यात्रियों को दिया है।