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UP Kiran,Digital Desk: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे समय से अपेक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंचने वाला है। इस समझौते के 2026 में लागू होने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) का उद्देश्य न केवल व्यापार को बढ़ावा देना है, बल्कि दोनों देशों के बाजारों को और भी बेहतर तरीके से जोड़ना है।

भारत के निर्यातकों को मिलेगा महत्वपूर्ण फायदा

भारत के निर्यातक खासतौर पर लाभान्वित होने वाले हैं, क्योंकि CETA के तहत 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इससे भारत के कई प्रमुख उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है, जैसे कि टेक्सटाइल, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, स्पोर्ट्स गुड्स और खिलौने। इन उत्पादों के निर्यातकों को अब ब्रिटेन में अपने माल को ज्यादा प्रतिस्पर्धी दरों पर बेचने का मौका मिलेगा।

भारत में ब्रिटिश उत्पादों के लिए खुलेंगे दरवाजे

इसके अलावा, भारत में ब्रिटिश उत्पादों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे। विशेष रूप से चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक जैसे उपभोक्ता उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की योजना है, जिससे भारतीय ग्राहकों को इन उत्पादों पर कम दाम चुकाने पड़ेंगे। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जो इन विदेशी उत्पादों को अपनी दैनिक जरूरतों में शामिल करते हैं।

स्कॉच व्हिस्की और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर बड़ा बदलाव

समझौते के लागू होने के बाद, स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क को 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसके बाद, 2035 तक इसे और भी घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना है। यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी साबित हो सकता है, जो स्कॉच व्हिस्की के शौकीन हैं।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आने वाला है। वर्तमान में ब्रिटेन से आयातित कारों पर जो 110 प्रतिशत शुल्क है, उसे पांच वर्षों में घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इससे भारतीय बाजार में ब्रिटिश कारों की उपलब्धता बढ़ेगी और भारत के इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन निर्माताओं को ब्रिटेन के बाजार में अच्छा अवसर मिलेगा।