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Up kiran,Digital Desk :  राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स के इस समिट में शामिल होने को लेकर पिछले कुछ घंटों से चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। 'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन' ने आधिकारिक बयान जारी कर उन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि गेट्स का भारत दौरा रद्द हो गया है।

वेबसाइट से नाम हटने पर क्यों मचा बवाल?

दरअसल, मंगलवार सुबह एआई इम्पैक्ट समिट की आधिकारिक वेबसाइट से बिल गेट्स का नाम और फोटो अचानक हटा दी गई। इसके बाद सोशल मीडिया और टेक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई कि हाल ही में सामने आई “एप्सटीन फाइल्स” में नाम आने के बाद भारत सरकार ने उनके निमंत्रण की 'समीक्षा' की है या गेट्स ने खुद दौरा स्थगित कर दिया है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई थी, जिससे भ्रम और बढ़ गया।

गेट्स फाउंडेशन की सफाई: "तय समय पर देंगे भाषण"

बढ़ते विवाद के बीच गेट्स फाउंडेशन ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर स्थिति स्पष्ट की। फाउंडेशन ने कहा:

शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं: बिल गेट्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समिट में हिस्सा लेंगे।

मुख्य भाषण: वे न केवल शामिल होंगे, बल्कि एआई के भविष्य और इसके सामाजिक प्रभावों पर अपना मुख्य भाषण (Keynote Address) भी देंगे।

अफवाहों से बचें: फाउंडेशन ने निमंत्रण रद्द होने की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है।

वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा: भारत बना AI का केंद्र

बिल गेट्स के अलावा इस 5 दिवसीय महाकुंभ (16-20 फरवरी) में दुनिया की तमाम बड़ी टेक हस्तियां जुट रही हैं।

ग्लोबल टेक लीडर्स: सैम ऑल्टमैन (OpenAI), सुंदर पिचाई (Google), एलेक्जेंडर वांग और क्रिस्टियानो आमोन (Qualcomm) जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं।

भारतीय दिग्गज: रिलायंस के मुकेश अंबानी, टाटा संस के एन. चंद्रशेखरन और इंफोसिस के सलील पारेख भी भारत की एआई शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।

यूएन प्रमुख: दूसरे दिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

समिट का उद्देश्य: 'हाइप' नहीं, आम आदमी का विकास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य 'जनहित' बताया है। भारत इस समिट के जरिए 'ग्लोबल साउथ' का नेतृत्व कर रहा है।

फोकस एरिया: एआई का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में कैसे क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, इस पर मंथन किया जा रहा है।

ग्लोबल लीडरशिप: यूके, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद भारत अब एआई की वैश्विक नीति तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।