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Up Kiran, Digital Desk: भारत और जापान की दोस्ती कितनी गहरी है, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जापान ने भारत की तरक्की में भागीदार बनने के लिए एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। जापान, भारत में अगले कुछ सालों के दौरान 68 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 5.6 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रहा है। यह रक़म इतनी बड़ी है कि इससे भारत के विकास की तस्वीर पूरी तरह से बदल सकती है।

अक्सर जब भी भारत-जापान की बात होती है, तो लोगों के दिमाग़ में सिर्फ़ बुलेट ट्रेन का ख़याल आता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जापान का यह निवेश सिर्फ़ बुलेट ट्रेन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के उन ज़रूरी क्षेत्रों को मज़बूती देगा, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे।

कहाँ-कहाँ इस्तेमाल होगा यह पैसा?

जापान का यह निवेश एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मक़सद भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद करना और चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना है। इस पैसे का बड़ा हिस्सा इन 5 सेक्टर्स में लगाया जाएगा:

हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन): मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट तो सिर्फ़ एक शुरुआत है। इस निवेश से देश में कई और नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने के काम में तेज़ी आएगी।

शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत के छोटे-बड़े शहरों को जापान की मदद से एक नया रूप दिया जाएगा। इसमें नए मेट्रो नेटवर्क बिछाने से लेकर सड़कों, पुलों और फ्लाईओवर का जाल तैयार करना शामिल है।

ऊर्जा और पर्यावरण: जापान, भारत को क्लीन एनर्जी यानी साफ़-सुथरी ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। इसमें सोलर पावर, ग्रीन हाइड्रोजन और पर्यावरण को साफ़ रखने वाली नई तकनीकों पर ख़ास ज़ोर दिया जाएगा।

नॉर्थ-ईस्ट का विकास: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, जिन्हें 'अष्टलक्ष्मी' भी कहा जाता है, के विकास पर यह पैसा ख़ास तौर पर ख़र्च होगा। जापान वहाँ कनेक्टिविटी, रोड नेटवर्क और उद्योगों को बढ़ावा देने में भारत का साथ देगा।

टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन: जापान अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी को भारत के साथ साझा करेगा और यहाँ एक मज़बूत सप्लाई चेन बनाने में मदद करेगा, ताकि ज़रूरी सामानों के लिए हमें किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहना पड़े।

साफ़ है कि जापान का यह क़दम सिर्फ़ एक निवेश नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती ताक़त पर उसके भरोसे का प्रतीक है। यह दोस्ती भारत को न सिर्फ़ आर्थिक रूप से मज़बूत बनाएगी, बल्कि एशिया में चीन के बढ़ते दबदबे को भी एक कड़ा जवाब देगी।

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