Up Kiran, Digital Desk: हाल ही में एक अध्ययन में यह पाया गया कि जिन लोगों को लंबे समय तक कब्ज की समस्या रहती है, उनके दिमाग पर इसका असर पड़ता है। ये लोग सोचने और समझने में कमजोर हो जाते हैं। उनका मस्तिष्क ठीक से काम नहीं करता, जिससे कार्य में ध्यान केन्द्रित करना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन लोगों को दिन में दो बार शौच जाना पड़ता है, उन्हें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं ज्यादा होती हैं। इसलिये कब्ज का इलाज समय पर करना अत्यंत आवश्यक है और इसे हलके में नहीं लेना चाहिए।
पेट की खराबी से बढ़ता है टाइप 3 डायबिटीज और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का खतरा
जब पेट सही ढंग से काम नहीं करता तो इसका सीधा असर मस्तिष्क पर पड़ता है। इससे कुछ गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जैसे:
टाइप 3 डायबिटीज: यह एक नई तरह की डायबिटीज है, जिसमें मस्तिष्क इंसुलिन का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता।
कोलन कैंसर: लंबे समय तक कब्ज और पेट की सफाई न होने से आंतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर: मानसिक बीमारियां और तनाव की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इम्यूनिटी में कमी: खासकर छोटे बच्चों में यह समस्या ज्यादा होती है। इसलिए अगर पेट ठीक नहीं है तो सिर्फ पाचन तंत्र ही नहीं, पूरा शरीर और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
कब्ज क्यों होती है? इसके प्रमुख कारण
पानी की कमी
फाइबर का कम सेवन (फल, सब्ज़ी, सलाद कम खाना)
अधिक तला-भुना या जंक फूड खाना
शारीरिक गतिविधि की कमी
तनाव और नींद की कमी
कब्ज से जुड़ी समस्याएं
अगर कब्ज हो तो सुबह पेट ठीक से साफ नहीं होता, जिससे निम्नलिखित समस्याएं होती हैं:
गंदी गैस (फार्टिंग)
मुंह से दुर्गंध आना
उल्टी जैसा महसूस होना
शरीर में भारीपन और चिड़चिड़ापन बना रहना
कब्ज से बचाव के उपाय
कब्ज से बचने के लिए कुछ जरूरी बदलावों की आवश्यकता है:
रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं
डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्ज़ी, साबुत अनाज शामिल करें
फास्ट फूड और तली हुई चीज़ों से परहेज करें
नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि या वॉक करें
रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें
सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं ताकि पेट आसानी से साफ हो
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें




