Up kiran,Digital Desk : गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष अब धीरे-धीरे थमने की ओर है। गोलीबारी की घटनाएं अभी भी बीच-बीच में होती रहती हैं, लेकिन शांति स्थापना के अगले चरण पर काम शुरू हो चुका है। इसी क्रम में भारत ने इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रयासों की सराहना की है, हालांकि इस समर्थन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया गया।
भारत का संयुक्त राष्ट्र में बयान
भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में गाजा संघर्ष और शांति स्थापना को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के कार्यान्वयन में हाल ही में हुई प्रगति पर ध्यान दे रहा है और इस दीर्घकालिक संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका के योगदान की सराहना करता है।
गाजा में शांति समझौते का दूसरा चरण
इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं और गाजा पूरी तरह तबाह हो गया है। अमेरिका के मध्यस्थ प्रयासों से लगभग दो साल से जारी संघर्ष में शांति की दिशा में पहल हुई है। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में गाजा शांति समझौता अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है।
प्रस्ताव 2803 और गाजा का पुनर्विकास
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 में गाजा को आतंकवाद-मुक्त बनाने और इसके पुनर्विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन किया गया। इस योजना के तहत एक 'शांति बोर्ड' (BOP) बनाया गया है, जो गाजा में संक्रमणकालीन प्रशासन और पुनर्विकास की प्रक्रिया को देखेगा और वित्तपोषण का समन्वय करेगा।
हरीश ने बताया कि गाजा का पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का निरंतर सहयोग और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसके सभी रूपों की कड़ी निंदा की जानी चाहिए।
मलबे और पुनर्निर्माण की चुनौतियाँ
भारत ने गाजा में पुनर्निर्माण के पैमाने की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यूएनओपीएस के अनुमान के अनुसार गाजा में 60 मिलियन टन मलबा है, जिसमें हानिकारक तत्व भी शामिल हैं। इसलिए पारंपरिक पुनर्निर्माण मॉडल पर्याप्त नहीं होंगे और तकनीकी सटीकता के साथ नवाचार की आवश्यकता है।
मानवीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
भारत ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ है, लेकिन सर्दी और विनाश की व्यापकता इस कार्य को कठिन बना रही है। भारत ने सुरक्षित मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अपील भी दोहराई।


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