
Up Kiran, Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय राजनीति की शतरंज पर इस वक़्त एक बहुत ही रोमांचक खेल चल रहा है। एक तरफ़ हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो भारत पर टैरिफ़ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ हैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो इस धमकी का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने एक्शन से दे रहे हैं। SCO (शंघाई सहयोग संगठन) शिखर सम्मेलन 2025 के मंच पर पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ात, इसी एक्शन का सबसे बड़ा सबूत है।
क्या है अमेरिका का गुस्सा और ट्रंप की धमकी?
मामला शुरू हुआ भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर। अमेरिका और पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत, रूस से दूरी बना ले। जब भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ऊपर रखते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा, तो डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए। उन्होंने न सिर्फ़ भारत की अर्थव्यवस्था को "डेड" (Dead Economy) कहा, बल्कि यह धमकी भी दी कि वह भारत से आने वाले कई सामानों पर भारी-भरकम टैक्स लगा देंगे।
आसान भाषा में, ट्रंप भारत पर दबाव बना रहे थे कि वह उनके हिसाब से चले, वरना आर्थिक नुक़सान के लिए तैयार रहे।
भारत का जवाब: झुकेगा नहीं!
तो ऐसे में भारत ने क्या किया? क्या वह डर गया? बिल्कुल नहीं! भारत ने SCO शिखर सम्मेलन के मंच का इस्तेमाल दुनिया को यह संदेश देने के लिए किया कि भारत अब किसी के दबाव में आने वाला नहीं है।
पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाक़ात सिर्फ़ एक औपचारिक बैठक नहीं थी। यह अमेरिका को एक सीधा और साफ़ संदेश था:
हमारे दोस्त, हमारी मर्ज़ी: भारत अपने दोस्त ख़ुद चुनेगा। रूस, भारत का एक पुराना और भरोसेमंद साथी है, और भारत यह दोस्ती निभाना जानता है।
हमारे हित सबसे ऊपर: भारत अपनी विदेश नीति अपने देश के लोगों के हितों को देखकर तय करेगा, किसी और देश की धमकी से नहीं। सस्ता तेल खरीदना भारत की ज़रूरत है, और वह इसे पूरा करेगा।
अब दुनिया बदल रही है: SCO, जिसमें रूस और चीन जैसे बड़े देश शामिल हैं, अब पश्चिमी देशों के दबदबे को चुनौती देने वाला एक बड़ा संगठन बन गया है। भारत इस बदलते हुए वैश्विक समीकरण का एक अहम हिस्सा है
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