Up Kiran,Digital Desk: भारत अपनी रक्षा ताकत को न केवल बढ़ा रहा है बल्कि अब आत्मनिर्भरता की दिशा में भी तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। जहां एक ओर देश पारंपरिक हथियार प्रणालियों पर निर्भर था, वहीं अब स्वदेशी तकनीकों को लेकर एक नया युग शुरू हो रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण DRDO द्वारा विकसित की जा रही लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो भारतीय सेना की समुद्री ताकत को एक नई दिशा देने वाली है।
हाइपरसोनिक मिसाइल: तेज़ी और सटीकता में एक कदम आगे
यह हाइपरसोनिक मिसाइल केवल गति और पावर के मामले में अद्वितीय नहीं है, बल्कि यह दुश्मन के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। DRDO के प्रमुख समीर वी. कामत के अनुसार, इस मिसाइल के अब तक दो सफल परीक्षण हो चुके हैं और तीसरे परीक्षण की तैयारी चल रही है। अगर परीक्षण सफल होते हैं तो यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों के हाथों में एक महत्वपूर्ण अस्त्र बन जाएगी।
इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसकी गति ब्रह्मोस जैसी मौजूदा प्रणालियों से कहीं अधिक होगी। हाइपरसोनिक स्पीड के कारण, इसे ट्रैक और इंटरसेप्ट करना दुश्मन के लिए बेहद कठिन होगा। यह भारत के सामरिक ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
समुद्र और ज़मीन दोनों पर प्रभाव
इस परियोजना का प्राथमिक फोकस समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर है, क्योंकि यह मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों और समुद्री प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाने में सक्षम होगी। हालांकि, DRDO इसके ज़मीनी हमले वाले संस्करण पर भी काम कर रहा है, जो अभी विकास के प्रारंभिक चरण में है।
बजट से मिली मजबूती
भारत का रक्षा बजट 2026 के केंद्रीय बजट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इस साल स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 1.39 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिससे भारत के भीतर ही अत्याधुनिक तकनीकों का विकास तेज़ी से होगा। खास बात यह है कि DRDO को 15.6% अधिक बजट आवंटित किया गया है, जिससे नई प्रणालियों पर अनुसंधान और विकास को गति मिलेगी।
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