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Up kiran,Digital Desk : मिडिल ईस्ट के रणमैदान में ईरान ने वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना महाशक्ति अमेरिका ने सपने में भी नहीं की थी। दो दशकों में पहली बार अमेरिकी वायुसेना को विदेशी धरती पर इतना भीषण झटका लगा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के दो सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों—F-15E स्ट्राइक ईगल और A-10 थंडरबोल्ट—को मार गिराया है। इस भीषण टकराव में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जिससे पेंटागन में हड़कंप मच गया है।

इराक युद्ध के बाद पहली बार ऐसा 'चमत्कार'

यह घटना सैन्य इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है। आखिरी बार 2003 के इराक युद्ध के दौरान अमेरिका का A-10 थंडरबोल्ट विमान गिराया गया था। तब से अब तक किसी भी देश की हिम्मत अमेरिकी विमानों को छूने की नहीं हुई थी। ईरान की इस कार्रवाई ने डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें उन्होंने दो दिन पहले ही कहा था कि "अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया है।" अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है कि ईरान का यह पलटवार किसी 'खतरनाक चमत्कार' से कम नहीं है।

एक पायलट सुरक्षित, दूसरे की तलाश में जुटी सेना

शुक्रवार को हुए इस हमले के बाद जानकारी सामने आई है कि F-15E के एक पायलट को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बचा लिया है, लेकिन दूसरा पायलट अब भी लापता है। लापता क्रू मेंबर की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, ईरान की मीडिया का दावा है कि उन्होंने दूसरे विमान (A-10) को भी निशाना बनाया है, जिससे अमेरिकी खेमे में भारी नुकसान की आशंका है।

बढ़ता जा रहा है मौतों का आंकड़ा

बीबीसी द्वारा जारी अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। घायल सैनिकों की संख्या भी तेजी से बढ़कर 365 पहुंच गई है। घायलों की इस सूची में सेना के 247, नौसेना के 63, वायुसेना के 36 और 19 मरीन कमांडो शामिल हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि लापता पायलट को खोजने के दौरान घायल हुए जवान इस सूची में शामिल हैं या नहीं, लेकिन मरने वालों का आंकड़ा स्थिर बना हुआ है।

ट्रंप की चुनौती और जमीनी हकीकत

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ईरान को घुटनों पर लाने की बात कही थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। एक तरफ अमेरिका ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी दे रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत दिखाकर यह साबित कर दिया है कि वह आसानी से हार मानने वाला नहीं है। फिलहाल, अमेरिकी अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि विमानों को तकनीकी खराबी की वजह से नुकसान हुआ या ईरान ने किसी नई मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल किया है।