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Up Kiran, Digital Desk: पड़ोसी मुल्कों के बीच रिश्ते हमेशा से ही थोड़े नाजुक रहे हैं, खासकर जब बात भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की हो। एक बार फिर पाकिस्तान ने अपनी नाकामी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की कोशिश की है। तुर्की के शहर इस्तांबुल में तालिबान के साथ शांति वार्ता नाकाम होने के बाद पाकिस्तान ने सीधे तौर पर भारत पर आरोप लगा दिया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार भारत के इशारों पर काम कर रही है और भारत इस इलाके में अशांति फैलाने के लिए "प्रोक्सी वॉर" यानी छद्म युद्ध लड़ रहा है। उन्होंने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "भारत काबुल की सरकार में घुसपैठ कर चुका है और इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि नई दिल्ली अफगानिस्तान के जरिए प्रोक्सी वॉर लड़ रहा है।"

क्यों नाकाम हुई शांति वार्ता?

ख्वाजा आसिफ का कहना है कि इस्तांबुल में चार दिनों तक चली यह बातचीत इसलिए बेनतीजा रही क्योंकि अफगानी पक्ष बार-बार अपनी बात से मुकर रहा था। उन्होंने दावा किया, "जब भी हम किसी समझौते के करीब पहुंचते थे, तो काबुल से कोई दखल होता था और समझौता वापस ले लिया जाता था।"

यह शांति वार्ता इसलिए हो रही थी ताकि दोनों देशों की सीमा पर हो रहे हमलों को रोका जा सके। कुछ समय पहले दोहा में भी एक दौर की बातचीत हुई थी, जिसके बाद 19 अक्टूबर को कुछ समय के लिए संघर्ष विराम भी हुआ था। लेकिन सीमा पर होने वाली झड़पों में सैनिकों, आम नागरिकों और आतंकियों समेत कई लोगों की जान जा चुकी है।

पाकिस्तान ने दी बदले की धमकी

बात सिर्फ आरोपों पर ही खत्म नहीं हुई। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने तालिबान को सीधी धमकी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान पर कोई हमला हुआ, तो उसका 50 गुना ज़्यादा ताकत से जवाब दिया जाएगा।

पाकिस्तान लगातार तालिबान पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह अपनी जमीन पर उन आतंकियों को पनाह दे रहा है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं, तालिबान हमेशा इन आरोपों से इनकार करता आया है।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान का कहना है कि वह कतर और तुर्की जैसे दोस्त देशों के कहने पर ही इस शांति प्रक्रिया में शामिल हुआ था। लेकिन अब जब बात नहीं बनी, तो पूरा दोष भारत और तालिबान पर मढ़ा जा रहा है।