Up Kiran, Digital Desk: पिछले हफ्ते इज़रायल ने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि देश संभावित जवाबी हमलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। व्हाइट हाउस के करीबी स्रोतों के अनुसार, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को स्पष्ट किया कि इज़रायल के पास ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
क्षेत्र में अमेरिकी बलों की कमी
नेतन्याहू का कहना था कि अमेरिकी सेना की पर्याप्त तैनाती न होने की वजह से इज़रायल खुद की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भी माना कि 12 दिवसीय संघर्ष के दौरान अमेरिकी बलों की अपर्याप्त मौजूदगी एक रणनीतिक कमजोरी थी। इस दौरान इज़रायल ने अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर काफी भरोसा किया था, जो पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हुआ।
ट्रंप और नेतन्याहू की लंबी बातचीत
14 जनवरी को दोनों नेताओं के बीच लंबी फोन बातचीत हुई। उम्मीद थी कि ट्रंप ईरान पर हवाई हमले का आदेश देंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान ने भी इसी दौरान ट्रंप को क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के कारण हमले से रोकने की सलाह दी।
तनाव कम करने वाले संदेश
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यपूर्व मामलों के अमेरिकी सलाहकार स्टीव विटकॉफ को संदेश भेजा, जिसने संभावित संघर्ष की तीव्रता को कम करने में मदद की। इस संदेश के बाद ट्रंप ने हमला स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, वरिष्ठ सलाहकारों की चेतावनी और अमेरिकी सेना की सीमित उपस्थिति ने भी हमले को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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