Up kiran,Digital Desk : दिल्ली में इन दिनों भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ी और ज़रूरी बातचीत चल रही है। बैठक शुरू होने से पहले, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (Trade Representative) जैमिसन ग्रीर ने एक बहुत ही मज़ेदार बात कही, जिससे पता चलता है कि दुनिया भारत को आज किस नज़र से देख रही है।
उन्होंने कहा, "India is a tough nut to crack," जिसका मतलब है कि "भारत को मनाना या उससे कोई डील पक्की करना लोहे के चने चबाने जैसा है।"
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि भारत ने उन्हें जो ऑफर दिया है, वैसा शानदार ऑफर उन्हें पूरी दुनिया में किसी और देश से नहीं मिला है।
तो आखिर अमेरिका भारत से चाहता क्या है?
सीधी सी बात है - अमेरिका चाहता है कि भारत उससे ढेर सारा अनाज और खेती से जुड़े दूसरे प्रोडक्ट्स (जैसे मीट, सोयाबीन, मक्का) खरीदे। अमेरिका में अनाज की पैदावार बहुत ज़्यादा होती है और अब वह अपने किसानों के लिए भारत में एक बड़ा बाज़ार देख रहा है। आंकड़े देखें तो अमेरिका हर साल 30 अरब डॉलर (लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये) का सोयाबीन और 17 अरब डॉलर का मक्का दुनिया भर में बेचता है।
लेकिन भारत का रुख भी एकदम साफ़ है!
भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारे लिए अपने देश के किसान सबसे पहले हैं। हम उन्हें किसी भी बाहरी मुकाबले से बचाकर रखेंगे और कोई ऐसा समझौता नहीं करेंगे, जिससे हमारे किसानों को नुकसान हो।
कहाँ फंसा है पेंच?
एक बड़ा पेंच जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों को लेकर फंसा है। अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश उसके सोयाबीन का इस्तेमाल बायोफ्यूल (गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला एक तरह का ईंधन) बनाने में करें। लेकिन भारत ने साफ़ कह दिया है कि हम सिर्फ जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करेंगे। हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए भारत इस बात पर विचार कर रहा है कि बायोफ्यूल के लिए अमेरिका से GM सोयाबीन खरीदा जा सकता है।
तो कुल मिलाकर कहानी यह है कि अमेरिका को भारत में एक बहुत बड़ा मौका दिख रहा है, लेकिन भारत अपनी शर्तों पर, अपने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही कोई भी कदम आगे बढ़ाएगा।
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