Up kiran,Digital Desk : वरिष्ठ अभिनेता‑राजनेता कमल हासन ने हाल‑ही में विवादों में फँसी थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर चिंताएँ जताईं हैं। उन्होंने बिना किसी संस्था या किसी फिल्म का सीधे नाम लिए यह मुद्दा उठाया है, लेकिन यह बयान इसी समय आया है जब जन नायकन का रिलीज़ शेड्यूल सेंसर सर्टिफिकेट विवाद की वजह से अटक गया है।
क्या है पूरा विवाद?
‘जन नायकन’ — जो विजय की आख़िरी फिल्म मानी जा रही है और पोंगल (9 जनवरी) पर रिलीज़ होनी थी — सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से यू/ए (16+) प्रमाणपत्र नहीं मिलने की वजह से फिलहाल अटकी हुई है। मद्रास हाई कोर्ट ने भी पहले दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें कोर्ट ने CBFC से प्रमाणपत्र देने को कहा था। ऐसे में रिलीज़ अब कम‑से‑कम 21 जनवरी तक स्थगित दिखाई दे रही है।
कमल हासन के मुख्य बिंदु
• अभिव्यक्ति की आज़ादी पर ज़ोर: कमल हासन ने कहा कि भारत के संविधान में अभिव्यक्ति की आज़ादी का समर्थन है और आर्थिक‑रचनात्मक गतिविधियों तथा कलाकारों की रोज़ी‑रोटी एक पारदर्शी और समयबद्ध सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
• पारदर्शिता की आवश्यकता: उन्होंने कहा कि जब सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अस्पष्ट होती है तो इससे रचनात्मकता, आर्थिक गतिविधियां और जनता‑विश्वास सभी प्रभावित होते हैं। इसलिए हर कट या एडिट के लिए लिखित, तर्कसंगत कारण बताना चाहिए और समय‑सीमा तय होनी चाहिए।
• सिनेमा के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन: हासन ने यह भी कहा कि फिल्म केवल एक ही व्यक्ति का काम नहीं है — इसमें लेखकों, कलाकारों, तकनीशियनों, प्रदर्शकों और कई छोटे व्यवसाय जुड़े हैं — और इनकी रोज़ी‑रोटी भी सीधी तौर पर एक न्यायपूर्ण सर्टिफिकेशन व्यवस्था पर निर्भर है।
क्या यह सिर्फ ‘जन नायकन’ तक सीमित है?
कमल हासन ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला किसी एक फिल्म से बड़ा है और यह दर्शाता है कि भारतीय लोकतंत्र में कला और कलाकारों को कितना स्थान दिया जाता है, खासकर जब विवाद के कारण एक बड़ी फिल्म की रिलीज़ पर असर पड़ता है।




