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liquor policy Loss: दिल्ली विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश होने के बाद सियासी घमासान मच गया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार की शराब नीति के चलते सरकारी खजाने को 2000.68 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इस खुलासे के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
विपक्ष की नेता आतिशी ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि शराब नीति में हुए नुकसान के लिए तीन लोग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने मांग की कि इन तीनों के विरुद्ध जांच होनी चाहिए।
आतिशी ने कहा कि बड़ा सवाल ये है कि सरकारी खजाने में 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तो इसके पीछे कौन जिम्मेदार है? उन्होंने सीधे तौर पर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना, सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर इल्जाम लगाए। कहा यही तीनों कसूरवार हैं।
तीन वजह से शराब नीति नहीं हो सकी लागू
पहला आरोप: दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नई शराब नीति को लागू नहीं होने दिया और इसमें अड़चनें डालीं। दूसरा आरोप: CBI ने नीति के एक साल पूरे होने से पहले ही इस पर FIR दर्ज कर दी। तीसरा आरोप: ED ने इस नीति पर ECIR (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) फाइल कर दी, जिससे अधिकारियों पर दबाव बढ़ा और कोई भी इस नीति पर आगे हस्ताक्षर करने की हिम्मत नहीं कर सका।