Up kiran,Digital Desk : रूस-यूक्रेन के बाद अब मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में छिड़े भीषण युद्ध का असर सीधे आपकी रसोई तक पहुँचने लगा है। युद्ध के कारण देश में एलपीजी (LPG) की संभावित किल्लत और बढ़ती कीमतों को देखते हुए भारत सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाने का मन बना लिया है। सरकार अब रसोई गैस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए 'एथनॉल' (Ethanol) को एक स्वच्छ और सस्ते कुकिंग फ्यूल के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
एलपीजी का विकल्प बनेगा एथनॉल: IIT और LERC ने कसी कमर
पेट्रोलियम उद्योग ने मंगलवार को उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें एथनॉल को भारतीय घरों के लिए मुख्य ईंधन बनाने का आह्वान किया गया। फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) के निदेशक आर.एस. रवि ने बताया कि एलपीजी उपकरण अनुसंधान केंद्र (LERC) और विभिन्न IIT संस्थानों में एथनॉल आधारित चूल्हों (Stoves) पर तेजी से शोध चल रहा है। अच्छी खबर यह है कि इन चूल्हों के प्रोटोटाइप (प्रारूप) जल्द ही तैयार होकर बाजार में आने की संभावना है।
सीधे घरों तक पहुँचेगा एथनॉल, बदलेगा सप्लाई मॉडल
अभी तक देश में एथनॉल का इस्तेमाल मुख्य रूप से पेट्रोल में मिश्रण (E-20) के लिए किया जाता था और इसकी थोक आपूर्ति पेट्रोलियम कंपनियों को होती थी। लेकिन अब सरकार एक ऐसा 'प्रैक्टिकल सप्लाई चेन' विकसित करने पर जोर दे रही है जिससे एथनॉल सीधे आम आदमी के घरों तक पहुँच सके। इसके लिए ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) से सक्रिय सहयोग मांगा गया है ताकि वितरण का एक प्रभावी और सुरक्षित मॉडल तैयार किया जा सके।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
मिडिल ईस्ट संकट: युद्ध की वजह से गैस के आयात में बाधा आ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर हैं।
स्वच्छ और सस्ता ईंधन: एथनॉल एक जैव ईंधन (Bio-fuel) है जो प्रदूषण कम फैलाता है और एलपीजी के मुकाबले किफायती साबित हो सकता है।
आत्मनिर्भर भारत: एथनॉल का उत्पादन देश के भीतर ही होता है, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म होगी।
क्या होगा आम आदमी पर असर?
अगर यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले समय में आपको महंगे एलपीजी सिलेंडर बुक करने की झंझट से मुक्ति मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य एथनॉल आधारित स्टोव का उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ाना है ताकि यह हर भारतीय रसोई का हिस्सा बन सके। पेट्रोल में 20% एथनॉल मिश्रण की सफलता के बाद अब 'रसोई में एथनॉल' सरकार का अगला बड़ा मिशन है।




