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Up kiran,Digital Desk : झारखंड में अब मजदूरों और कंपनियों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने का तरीका बदलने वाला है। राज्य के सभी श्रम न्यायालय, जिन्हें हम 'लेबर कोर्ट' के नाम से जानते हैं, अब 'औद्योगिक न्यायाधिकरण' कहलाएंगे। यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि काम करने का पूरा तरीका भी बदल जाएगा।

कोर्ट में अब जज के साथ बैठेंगे बड़े अफसर

अब तक लेबर कोर्ट में सिर्फ एक जज ही सुनवाई करते थे, लेकिन नई व्यवस्था में उनके साथ एक प्रशासनिक अधिकारी भी बैठेंगे। यह अधिकारी सरकार में संयुक्त सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी) रैंक का होगा। यानी, अब हर मामले की सुनवाई दो लोगों की बेंच करेगी। हालांकि, फैसले लेने की मुख्य शक्ति पहले की तरह जज के पास ही रहेगी।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

दरअसल, केंद्र सरकार ने देश के पुराने और उलझे हुए 29 श्रम कानूनों को बदलकर 4 आसान श्रम संहिता (लेबर कोड) लागू किए हैं। झारखंड सरकार भी इसी नए कानून को अपने राज्य में लागू करने की तैयारी कर रही है। इसी के तहत लेबर कोर्ट का ढांचा भी बदला जा रहा है। सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा कर देगी। फिलहाल राज्य में रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, जमशेदपुर और हजारीबाग में लेबर कोर्ट चल रहे हैं, जो अब नए औद्योगिक न्यायाधिकरण बन जाएंगे।

क्या होगा इसका फायदा?

माना जा रहा है कि इस नए सिस्टम से मजदूरों से जुड़े मामलों को सुलझाने में तेजी आएगी। अक्सर नौकरी से निकालने, हड़ताल, छंटनी या यूनियन से जुड़े विवाद सालों तक कोर्ट में अटके रहते थे। अब दो सदस्यों की बेंच होने से इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई जल्दी हो सकेगी।

  • जल्दी मिलेगा न्याय: सालों से लटके मामलों में तेजी आएगी, जिससे मजदूरों और उद्योगों, दोनों को राहत मिलेगी।
  • कोर्ट का बोझ कम होगा: मामलों का निपटारा जल्दी होने से अदालतों पर पड़ रहा बोझ भी कम होगा।
  • भरोसा और पारदर्शिता बढ़ेगी: इस नई व्यवस्था से औद्योगिक संबंधों में पारदर्शिता आने और भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि इससे उद्योगों और कर्मचारियों, दोनों को एक स्थिर माहौल मिलेगा।

इसके अलावा, झारखंड सरकार 15 से भी ज्यादा पुराने श्रम कानूनों को खत्म करके, उन्हें चार नई नियमावली में बदलने पर भी काम कर रही है, ताकि कानूनों का जाल आसान हो सके और सभी को समझने में सहूलियत हो।