सुभाष विश्वकर्मा
उत्तर प्रदेश का वन निगम में भ्रष्टाचार चरित्र का ऐसा ग्रंथ है, जिसके हर पन्ने पर लूट-खसोट के तिलिस्म हैं। देविकी नंदन खत्री के उपन्यास चंद्रकांता से ज़्यादा अय्यारी के किस्से तो उत्तर प्रदेश वन निगम में हैं। फिलहाल आज कल वन निगम के भ्रष्टाचार के उपन्यास की कहानी सीबीआई ने भी पढ़नी शुरू कर दी है।
आइए आपको एक नई कहानी सुनाते हैं।
वन निगम में राम मिलन नाम का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। राम मिलन, अधिष्ठान चौकीदार पद पर प्रयागराज में तैनात हैं। राम मिलन को महाप्रबंधक कार्मिक और आर०एम०, वन निगम, सुजॉय बनर्जी ने जबरन अपने सरकारी आवास ए-5, 17 राणा प्रताप मार्ग, वन विभाग की कॉलोनी पर काम पर लगा रखा है। जहाँ उनसे घरेलु कार्य, झाड़ू पोछा, बर्तन सफाई , बिल्लियों तथा कुत्तों की देखभाल करने के लिए लगा रखा है। राम मिलन उनकी बिल्लियों और कुत्तों को सजाने, संवराने, नहलाने, खिलाने और टट्टी यानी पाटी कराने व टट्टी आदि साफ करके फेंकने के काम में लगा रहता है। राम मिलन से 20 घंटे की ड्यूटी आवास पर ली जाती है।
ये सारे सनसनीखेज आरोप अधिष्ठान चौकीदार राम मिलन की पत्नी चंद्रादेवी ने लगाए हैं। उनका कहना है कि श्री सुजॉय बनर्जी, महाप्रबंधक कार्मिक उत्तर प्रदेश वन निगम ने 9 बिल्लियां और कुछ कुत्ते पाल रखे हैं। बकौल चंद्रावती विगत ढाई वर्ष से लगातार उक्त जानवरों के साथ रहने के कारण उनके पति राम मिलन के पेट में इन्फेक्शन हो गया है , जिसके कारण उन्हें स्वरुप रानी अस्पताल प्रयागराज में भर्ती करना पड़ा।
श्रीमती चंद्रा देवी का यह भी कहना है कि बीमार होने के कारण ड्यूटी पर नहीं जाने तथा आवास का घरेलू कार्य न होने के कारण रंजिशवश श्री बनर्जी द्वारा मेरे पति को आवंटित सरकारी आवास (वन निगम कॉलोनी भवन संख्या - ए -2/253 प्रयागराज) खाली करवा लिया गया। श्रीमती चंद्रा देवी का यह भी कहना है कि श्री सुजॉय बनर्जी द्वारा उनके पति को बार-बार अनिवार्य सेवा निवृत्ति एवं आवास से पत्नी के गहने चोरी के इल्जाम में जेल भिजवाने की धमकी देते हैं। मेरे पति का सितम्बर 25 का वेतन भी रोक दिया गया है। यही नहीं, श्री बनर्जी द्वारा मेरे पति का दो वर्ष के कैरेक्टर रोल खराब कर दिया, जिसमें उनकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित नहीं की गयी है।
श्रीमती चन्द्रादेवी ने आगे कहा है कि मेरे पति को बनर्जी द्वारा ढाई वर्षों बंधक बनाकर रखा हुआ है, इस वजह से मेरे पति काफी भयभीत हैं जिससे उनकी तबियत बहुत खराब हो चुकी है। उनके साथ कोई भी अनहोनी होने पर बनर्जी व उनकी पत्नी उत्तरदायी होंगी।
राम मिलन की पत्नी और बेटे ने एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह से अपनी व्यथा कही। एमडी वन निगम से न्याय मिलता न देख राम मिलन की पत्नी ने वन निगम यूनियन के महामंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ला से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई। वन निगम महामंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एमडी वन निगम को यूनियन की तरफ से पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मुख्य सचिव , प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख सचिव गृह एवं सतर्कता , गोपन को भी पत्र के माध्यम से अवगत कराया। शासन ने मामले की जाँच के लिए बी प्रभाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक , अनुश्रवण एवं कार्य योजना को आदेशित किया। बी प्रभाकर भा0 व0 से0 जाँच अधिकारी ने 11 जून 2025 को अपनी जाँच आख्या शासन को भेजी गयी जिसे शासन द्वारा सुसंगत न पाते हुए जाँच आख्या पर असहमति जताते हुए अपने पत्र दिनांक 6 अगस्त, 2025 के द्वारा पुनः जाँच के लिए लिखा जिसमें शिकायतों की गम्भीरतापूर्वक जाँच कर जाँच आख्या एक सप्ताह के अंदर शासन को देने के स्पष्ट निर्देश थे। बी प्रभाकर से इस संबंध में जब बात की गयी तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी जाँच आख्या शासन को प्रेषित कर दी है।
मामले को लेकर वन निगम यूनियन महामंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ला से बात की तो उन्होंने बताया कि राम मिलन वन निगम के क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज में अधिष्ठान चौकीदार के रूप में कार्यरत है। जिसके ऊपर महाप्रबंधक कार्मिक (वन निगम) एवं क्षेत्रीय प्रबंधक सुजॉय बनर्जी द्वारा नियम कानून ताक पर रखकर उससे घरेलू कार्य लिए जा रहे हैं। श्री शुक्ला ने बताया कि सुजॉय बनर्जी महाप्रबंधक कार्मिक द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार एवं कर्मचारियों के उत्पीड़न से मुक्ति दिलाये जाने के संबंध में एमडी से लेकर शासन के आला अफसरों तक को कार्यवाही के लिए लिखा, जाँच अधिकारी द्वारा शिकायतों के संबंध में शपथ पत्र मांगे जाने पर उन्होंने जाँच अधिकारी को शपथपत्र भी दिया, चूँकि मामला वन विभाग के एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी के खिलाफ है इसलिए मामले में कार्रवाई को लेकर हीलाहवाली की जा रही है लेकिन यूनियन महाप्रबंधक कार्मिक एवं क्षेत्रीय प्रबधक सुजॉय बनर्जी के द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार एवं कार्मिक के उत्पीड़न की लड़ाई लड़ता रहेगा। इसके लिए अगर न्यायालय की शरण में जाना पड़ा तो यूनियन के महामंत्री की हैसियत से वो न्यायलय भी जायेंगे।
श्री शुक्ला ने बताया कि (1) उत्तर प्रदेश वन निगम संहिता में चौकीदार का कार्य डिपो , गोदाम में भंडारित प्रकाष्ठ एवं तेंदूपत्ता की सुरक्षा करना अथवा कार्यालय की सुरक्षा करना है।
(2) श्री राम मिलन चौकीदार द्वारा उत्तर प्रदेश वन निगम का कोई कार्य नहीं किया गया है। इनके द्वारा श्री बनर्जी के घर में घरेलु कार्य किया गया है अतः इन्हें विगत ढाई वर्षों में उत्तर प्रदेश वन निगम से भुगतान किया गया वेतन एवं संपूर्ण भत्ते , श्री सुजॉय बनर्जी महाप्रबंधक (कार्मिक) से वसूल किया जाये।
(3) यूनियन की जानकारी में ये तथ्य भी आया है कि श्री सुजॉय बनर्जी ने श्री राम मिलन को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का भय दिखाकर पुनः अपने आवास पर घरेलु कार्य करा रहे हैं।
राम मिलन के प्रयागराज में आवंटित आवास को निरस्त करने एवं बाजार दर से दो माह का किराया निगम द्वारा वसूले जाने के संबंध में महामंत्री शुक्ला ने बताया कि बनर्जी द्वारा आवास आवंटन रद्द करना और बाजार दर से किराये की वसूली करना नितांत अव्यवहारिक है साथ ही असंवैधानिक है। राम मिलन की तैनाती प्रयागराज में है जहाँ उसे सरकारी आवास मिला जिसमें उसकी पत्नी और बच्चे रहते थे। राम मिलन से महाप्रबंधक कार्मिक श्री बनर्जी द्वारा अपने निजी आवास को कैंप कार्यालय बताकर घरेलू कार्य लिया जा रहा है जबकि राम मिलन का वेतन प्रयागराज से निकल रहा है जहाँ उसकी मूल तैनाती है।
यूनियन महामंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ला द्वारा सुजॉय बनर्जी को भ्रष्टाचार में लिप्त अफसर बताया और कहा कि सुजॉय बनर्जी की मानवीय संवेदनाएं अत्यंत दुर्बल ही नहीं बल्कि मृतप्राय हो गयीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि श्री बनर्जी आदतन भ्रष्टाचारी एवं शोषक प्रवृत्ति के हैं। श्री बनर्जी यह भूल जाते हैं कि इससे कार्मिकों के जीवन का संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने एमडी वन निगम अरविन्द कुमार सिंह से अनुरोध किया है कि राम मिलन अधिष्ठान चौकीदार को श्री बनर्जी के नियंत्रणाधीन समस्त कार्यों से हटाते हुए उत्तर प्रदेश वन निगम के किसी भी अन्य क्षेत्र में तैनाती की जाये।
प्रबंध निदेशक अरविन्द कुमार सिंह से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि वे छोटे बड़े सभी कार्मिकों की सुनते हैं और शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी करते हैं। हालाँकि राम मिलन की पत्नी द्वारा दिए गए आवेदन पर अभी तक वन निगम प्रबंधन द्वारा अभी तक कोई कार्र्यवाई नहीं जान पड़ रही।
जानकारी करने पर पता चला कि निगम में ही कार्यरत वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी संजय कुमार को जाँच सौंपी गयी है। श्री संजय कुमार विभाग के उन अफसरों में हैं जिन्हें बेहद संजीदा अफसर माना जाता है जिन्हें अक्सर संवेदनशील मामलों में जाँच अधिकारी बना दिया जाता है फिर जाँच वर्षों कछुआ चाल से चलती रहती है। संजय कुमार और महाप्रबंधक कार्मिक सुजॉय बनर्जी की निकटता किसी से छुपी नहीं है ऐसे में वो निष्पक्ष जाँच कर पाएंगे इसमें संदेह है। राम मिलन के प्रकरण को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक प्रयागराज एवं महाप्रबंधक कार्मिक सुजॉय बनर्जी से बात की गयी तो उन्होंने पूरा दोष अधिष्ठान चौकीदार राम मिलन, उसकी पत्नी चंद्रादेवी और उसके बेटे के ऊपर मढ़ दिया। उन्होंने राम मिलन की पत्नी और बेटे पर वो लीगल एक्शन लेने की बात कही साथ ही उन्होंने राम मिलन के विरुद्ध चार्जशीट की भी बात कही और बताया कि ड्यूटी से गायब होने पर राम मिलन को चार्जशीट दी गयी है।
प्रयागराज स्थित राम मिलन के सरकारी आवास का आवंटन रद्द करने को लेकर उन्होंने बताया कि राम मिलन उनके कैंप कार्यालय में तैनात हैं इसलिए प्रयागराज के आवास का आवंटन रद्द किया, जब उनसे पूछा गया कि राम मिलन की तैनाती तो प्रयागराज में है और उसका वेतन भी भी वहीँ से निकल रहा है ऐसे में आवास आवंटन रद्द करने का क्या औचित्य है। इस पर सुजॉय बनर्जी स्पष्ट जवाब न देते हुए इधर उधर की बातें करने लगे। आपको बता दें कि जिस आवास ए 5 17 राणा प्रताप मार्ग को सुजॉय बनर्जी अपना कैंप कार्यलय बता रहे हैं दरअसल वो सुजॉय बनर्जी का वन विभाग की कॉलोनी में आवंटित सरकारी आवास है। कैंप कार्यालय बनाने के लिए एमडी वन निगम द्वारा जारी कोई आदेश अथवा अनुमति की बात उनके द्वारा नहीं कही गयी।
फिलहाल, वन निगम के किस्सों को अब सीबीआई ने भी पढ़ना शुरू कर दिया है।



_1408935244_100x75.png)
_1496622266_100x75.png)