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UP Kiran,Digital Desk: बिहार में रेंट एग्रीमेंट और लीज की फीस में बड़ी छूट का प्रस्ताव किया गया है। इस फैसले से राज्य के लाखों किरायेदारों को राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार की योजना के मुताबिक, रेंट एग्रीमेंट की फीस आधी की जाएगी, जिससे न केवल किरायेदारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि उन्हें कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है जो जल्द ही नई दरों की घोषणा करेगी।

किरायेदारों के लिए राहत की खबर
बिहार के विभिन्न हिस्सों में, खासकर पटना में, रेंट एग्रीमेंट और लीज की रजिस्ट्रेशन फीस बहुत अधिक होती है। इस भारी शुल्क के कारण कई लोग अपने किराएदारों से लिखित समझौते से बचते रहे हैं। अब इस प्रस्ताव के बाद, वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने समझौतों को कानूनी रूप से मान्यता दिलवा सकेंगे।

किराया और फीस का प्रभाव
पटना नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर में लगभग 3 लाख 10 हजार रजिस्टर्ड घर हैं, जिनमें से 10 लाख से अधिक लोग किराए पर रहते हैं। अभी तक रेंट एग्रीमेंट के लिए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में कुल किराए का करीब 2.5 प्रतिशत देना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर, यदि किराया 10 लाख रुपये है तो स्टांप ड्यूटी 5 हजार रुपये और रजिस्ट्रेशन शुल्क 20 हजार रुपये देना पड़ता था। इस प्रकार 10 साल के रेंट एग्रीमेंट के लिए करीब 25 हजार रुपये का खर्च आता था।

कानूनी सुरक्षा और बढ़ती जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि रेंट या लीज एग्रीमेंट को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त करने के लिए उसकी रजिस्ट्री कराना जरूरी है। सिर्फ नोटरी से दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कराने से कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती। रजिस्ट्री कराना ही एकमात्र तरीका है जिससे विवाद की स्थिति में किसी भी समझौते की वैधता साबित की जा सकती है।