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Up kiran,Digital Desk : अधिकांश भक्त जानते हैं कि शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि पूरे शिव परिवार का वास भी शिवलिंग में ही समाहित है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, शिवलिंग के अलग-अलग हिस्सों में माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी के साथ शिव-पुत्री अशोक सुंदरी भी विराजमान हैं। मान्यता है कि यदि आप शिवलिंग की पूजा के दौरान अशोक सुंदरी का ध्यान करते हैं, तो आपकी आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

कौन हैं अशोक सुंदरी?

अशोक सुंदरी भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री हैं। 'अशोक' का अर्थ है— 'शोक रहित' यानी जो दुखों को दूर करे। पुराणों के अनुसार, माता पार्वती के अकेलेपन को दूर करने के लिए कल्पवृक्ष से अशोक सुंदरी की उत्पत्ति हुई थी। इन्हें सुंदरता, धैर्य और धन-धान्य की देवी माना जाता है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और चिंताएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।

शिवलिंग में कहां है अशोक सुंदरी का स्थान?

शिवलिंग को ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि जहां से जल बहकर बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या गोमुख कहा जाता है), वहां बीच में एक उभरी हुई रेखा या मोटी सी जगह होती है।

स्थान: जलाधारी के बीचों-बीच जो मोटी सी रेखा बनी होती है, वही स्थान माता अशोक सुंदरी का है।

शिवलिंग के दाएं भाग में गणेश जी और बाएं भाग में कार्तिकेय जी का वास होता है, जबकि बीच की यह रेखा अशोक सुंदरी की मानी जाती है।

कैसे करें पूजा? धन लाभ के लिए विशेष विधि

यदि आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या व्यापार में उन्नति चाहते हैं, तो सोमवार के दिन इस विधि से पूजा करें:

जलाभिषेक: सबसे पहले जल में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। ध्यान रहे कि जल चढ़ाते समय वह अशोक सुंदरी के स्थान को स्पर्श करते हुए जाए।

तिलक: शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और साथ ही अशोक सुंदरी वाले स्थान पर भी चंदन का तिलक लगाएं।

बेलपत्र का अर्पण: एक बेलपत्र अशोक सुंदरी के स्थान पर चढ़ाएं (बेलपत्र की डंडी का मुख जलाधारी की ओर होना चाहिए) और दूसरा बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाएं।

मंत्र जाप: पूजा के दौरान 'ॐ अशोक सुंदरी देव्यै नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

मनोकामना: अपनी आर्थिक समस्याओं को माता अशोक सुंदरी के समक्ष कहें और उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

अशोक सुंदरी की पूजा के लाभ

आर्थिक स्थिरता: नियमित पूजा से रुके हुए धन की प्राप्ति होती है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।

पारिवारिक शांति: घर में हो रहे क्लेश और तनाव दूर होते हैं।

शोक से मुक्ति: जीवन में आने वाले दुखों और मानसिक चिंताओं का नाश होता है।

मनोकामना पूर्ति: विवाह में आ रही बाधाएं और संतान सुख से जुड़ी परेशानियां भी इस पूजा से दूर हो सकती हैं।