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Up Kiran, Digital Desk: संगम तट पर माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का सिलसिला अब एक और अहम पड़ाव पर पहुंचने वाला है। बसंत पंचमी के पावन स्नान के बाद माघी पूर्णिमा का स्नान लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक नई उम्मीद और आस्था की नई किरण लेकर आएगा। यह धार्मिक अवसर न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर में बसे हिंदू समुदाय के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस दिन लाखों लोग पुण्य की प्राप्ति के लिए संगम में डुबकी लगाएंगे और दान के जरिए अपनी धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करेंगे।

माघी पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

मुख्य स्नान तिथि: 1 फरवरी 2026, रविवार

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 1 फरवरी 2026 को सुबह 05:52 बजे

धार्मिक दृष्टिकोण से माघी पूर्णिमा का महत्व

माघी पूर्णिमा को धार्मिक परिप्रेक्ष्य में अत्यधिक महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्वंय देवता संगम के तट पर आकर स्नान करते हैं, जिससे यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्य की प्राप्ति का अवसर बनता है। खासकर उन श्रद्धालुओं के लिए जो माघ मेले में 'कल्पवास' करते हुए एक महीने तक गंगा किनारे रहते हैं, यह दिन उनके संकल्प का समापन और मुक्ति का दिन होता है।

माघी पूर्णिमा का दिन ऐसे एकजुट होने का अवसर है जब लोग न केवल खुद को शुद्ध करते हैं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए दान भी करते हैं। इस दिन गंगा में स्नान और दान से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है, जो उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है।

दान का महत्व

माघी पूर्णिमा के दिन खासतौर पर तिल, कंबल, घी, और अन्न का दान अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है। यह दान न केवल व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति के लिए होता है, बल्कि यह समाज में सहयोग और भाईचारे की भावना को भी बढ़ाता है। संगम तट पर हर साल सैकड़ों हजारों लोग इस अवसर का लाभ उठाने आते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।