Up Kiran, Digital Desk: आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की जब ग्रेहाउंड दस्ते ने एक मुठभेड़ के दौरान कुख्यात नक्सली कमांडर मदावी हिडमा को मार गिराया। इस ऑपरेशन में हिडमा के साथ उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का भी मारी गई। माओवादी संगठन की एक प्रमुख इकाई के नेता हिडमा पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। यह मुठभेड़ पूर्वी गोदावरी जिले के घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने माओवादी नेताओं के खिलाफ एक सटीक ऑपरेशन चलाया।
मुठभेड़ का विवरण
यह मुठभेड़ सुबह 6 से 7 बजे के बीच हुई, जब सुरक्षा बलों को क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी की खुफिया जानकारी मिली। आंध्र प्रदेश-तेलंगाना सीमा के पास स्थित जंगलों में जब सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान शुरू किया, तो वह एक गोलीबारी में बदल गया। इस ऑपरेशन में मदावी हिडमा, उसकी पत्नी और पांच अन्य माओवादी कार्यकर्ता मारे गए। हिडमा के अलावा, चेल्लूरी नारायण उर्फ सुरेश (जो स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था) और टेक शंकर भी इस मुठभेड़ में मारे गए।
आंध्र प्रदेश के डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने मुठभेड़ की पुष्टि की और कहा कि माओवादी खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए क्षेत्र में सघन तलाशी और निकासी अभियान जारी है।
कौन था मदावी हिडमा?
मदावी हिडमा, जो हिडमल्लू और संतोष के नाम से भी जाना जाता है, 1996 में महज़ 17 साल की उम्र में माओवादी आंदोलन से जुड़ा था। हिडमा का जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवारती गांव में हुआ था, और वह मुरिया जनजाति से था। माओवादी संगठन के भीतर उसकी अहमियत थी, और वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन-1 का एक प्रमुख सदस्य था।
हिडमा ने माओवादी आंदोलन के तहत सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत की और अपने नेतृत्व और रणनीतिक कौशल से जल्दी ही शीर्ष स्तर पर अपनी जगह बनाई। उसने स्थानीय आदिवासी क्षेत्रों में माओवादी विचारधारा फैलाने के लिए क्रांतिकारी स्कूल स्थापित किए थे।
हिडमा के नेतृत्व में बड़े हमले
हिडमा के नाम पर कई बड़े आतंकवादी हमले हुए, जिनमें सैकड़ों नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जानें गईं। उसकी योजनाओं और हमलों के कारण वह छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में एक डरावना नाम बन चुका था। हिडमा के कुछ सबसे चर्चित हमले इस प्रकार थे:
2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
2013 झीरम घाटी नरसंहार: जिसमें कांग्रेस पार्टी के 27 प्रमुख नेताओं की हत्या हुई।
2021 सुकमा-बीजापुर हमला: इस हमले में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।
हिडमा इन हमलों का व्यक्तिगत रूप से नेतृत्व करता था और उसे नक्सली नेटवर्क का सबसे खतरनाक चेहरा माना जाता था।
ऑपरेशन की अहमियत
सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को माओवादी विद्रोह के खिलाफ एक बड़ी जीत मान रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिडमा के खात्मे से बस्तर और आसपास के इलाकों में माओवादी नेटवर्क के बिखरने की संभावना है, जिससे पीएलजीए की युद्धक्षमता में भी कमी आ सकती है।




