Up kiran,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच अब मशहूर कवि और 'आप' के संस्थापक सदस्य रहे कुमार विश्वास का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। राज्यसभा में राघव चड्ढा को उप-नेता पद से हटाए जाने के बाद लोग इसे कुमार विश्वास की 'सटीक भविष्यवाणी' मान रहे हैं। विश्वास ने करीब डेढ़ साल पहले ही संकेत दे दिया था कि परिणीति चोपड़ा से शादी और राघव का बढ़ता 'ग्लैमरस' कद ही उनकी विदाई का कारण बनेगा।
'हीरोइन से शादी की और रील दिखने लगी... बस यहीं फंस गए'
एक पुराने पॉडकास्ट इंटरव्यू में कुमार विश्वास ने बिना लाग-लपेट के कहा था कि आम आदमी पार्टी में अगला शिकार कौन होगा। उन्होंने राघव चड्ढा का जिक्र करते हुए कहा था, "वह बालक लोकप्रिय हो गया है, हीरोइन (परिणीति चोपड़ा) से शादी कर ली है। अब उसकी रील दिखने लगी है, और यही बात नेतृत्व को खटकने लगी है।" विश्वास के मुताबिक, पार्टी के भीतर किसी और की बढ़ती आभा (Aura) बर्दाश्त नहीं की जाती। आज जब राघव को किनारे लगाया गया है, तो यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
खामोश कराया गया हूं, हारा नहीं: राघव चड्ढा का पलटवार
पार्टी द्वारा 'भाजपा के खिलाफ न बोलने' और 'सतही मुद्दे उठाने' के आरोपों पर राघव चड्ढा ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक भावुक संदेश में उन्होंने कहा, "सदन में जनता के हक की आवाज उठाना क्या अपराध है? मैंने टैक्स, टोल प्लाजा की लूट और खाने में मिलावट जैसे जमीनी मुद्दे उठाए।" उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें 'खामोश कराया गया है, वे हारे नहीं हैं।' राघव के इस बयान से साफ है कि वे पार्टी के फैसले से आहत हैं।
भगवंत मान ने बताया 'पार्टी लाइन' का उल्लंघन, कार्रवाई को ठहराया जायज
राघव चड्ढा पर हुई कार्रवाई को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक सामान्य प्रक्रिया बताया, लेकिन साथ ही कड़ा संदेश भी दिया। मान ने कहा, "पार्टी समय-समय पर अपने नेता और उप-नेता बदलती रहती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पार्टी के 'व्हिप' और सामूहिक फैसलों (जैसे वॉकआउट या नीतियों का विरोध) के खिलाफ जाता है, तो उस पर कार्रवाई होना निश्चित है।" मान के इस बयान ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि राघव ने अहम मौकों पर विपक्षी एकजुटता का साथ नहीं दिया था।
बीजेपी का तंज: 'आलोचना से डरता है केजरीवाल का नेतृत्व'
इस पूरे विवाद में अब भारतीय जनता पार्टी भी कूद पड़ी है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी में किसी भी तरह की आलोचना सहन नहीं कर सकते। उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल खुद को और पार्टी को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे अपने ही नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता से डरे हुए हैं। बीजेपी का कहना है कि राघव को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
सस्पेंस बरकरार: क्या बगावत करेंगे राघव चड्ढा?
राज्यसभा में राघव चड्ढा की जगह उद्योगपति अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद अब सबकी नजरें राघव के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या वे कुमार विश्वास की तरह पार्टी से अपनी राहें जुदा करेंगे या फिर 'खामोश' रहकर सही वक्त का इंतजार करेंगे? फिलहाल 'आप' के भीतर की यह रार थमने का नाम नहीं ले रही है।




