Up Kiran, Digital Desk: गाज़ा आज फिर लहूलुहान हो गया। इज़रायल ने जिस नासिर मेडिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया, वह गाज़ा के लोगों के लिए सिर्फ एक अस्पताल नहीं बल्कि उम्मीद की आख़िरी जगह थी। लेकिन रविवार की शाम यहां अचानक गरजते लड़ाकू विमानों से दागे गए मिसाइलों ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया। चारों ओर उठते धुएं और लगातार गूंजते धमाकों के बीच लोगों की चीखें गूंज उठीं।
इस हमले में 14 लोगों की जान चली गई। इनमें से 4 पत्रकार शामिल हैं। मौत के शिकार लोगों में मशहूर कतर चैनल अल जज़ीरा के कैमरामैन मोहम्मद सलाम भी थे। जैसे ही उनकी मौत की खबर आई, साथियों की आंखें भर आईं। कैमरे के पीछे से दुनिया को गाज़ा की हकीकत दिखाने वाले मोहम्मद अब खुद उसी कहानी का हिस्सा बन गए।
रॉयटर्स के सहयोगी पत्रकार हुसम अल-मासरी और एपी से जुड़ी मरियम अबू डग्गा की भी मौके पर ही मौत हो गई। इतना ही नहीं, एक फ्रीलांस पत्रकार और गाज़ा के सिविल डिफेंस संगठन का एक सदस्य भी इस हमले का शिकार हो गए। पत्रकारिता और जनसेवा का ये चेहरा हमेशा के लिए खामोश हो गया।
बमबारी का मंजर: ऊपर से मिसाइल, नीचे चीखें
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इज़रायली सेना ने पहले चौथी मंज़िल को निशाना बनाया। वहां मौजूद वार्ड कुछ सेकंडों में मलबे में तब्दील हो गया। घायलों और परिजनों की चीखें अभी शांत भी नहीं हुई थीं कि दूसरी मिसाइल आकर दूसरी मंज़िल को हिला गई। धूल और धुएं से भरे इस मंजर में कई एंबुलेंसें भी चपेट में आ गईं। आपातकालीन सेवाओं का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है।
हमले के बाद अस्पताल की गलियों में अफरा-तफरी मच गई। घायल लोग स्ट्रेचर पर जगह तलाशते रहे, डॉक्टर खुद मलबा हटाकर मरीजों तक पहुंचने की कोशिश करते दिखे। चारों ओर सिर्फ रोने और मदद की पुकार की आवाजें गूंज रही थीं।
वैश्विक स्तर पर निंदा, लेकिन जमीनी हालात बेबस
इज़रायल की इस कार्रवाई की दुनिया भर में तीखी निंदा हो रही है। कुछ दिनों पहले भी ऐसे ही एक हमले में पत्रकार मारे गए थे। इज़रायल ने उस वक्त दावा किया था कि अल जज़ीरा का मारा गया पत्रकार हमास के लिए काम करता था और वहां से तनख्वाह लेता था। हालांकि ताज़ा हमले पर इज़रायली सेना की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है।



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