UP Kiran,Digital Desk: भारत और इजरायल के रिश्ते एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे की चर्चा अब जोर पकड़ने लगी है। इस दौरे से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को एक "मजबूत साझेदार" के रूप में सम्मानित किया। नेतन्याहू ने यरुशलम में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान भारत-इजरायल संबंधों को और मजबूती देने की बात कही। उनका कहना था कि भारत जैसे वैश्विक प्रभाव वाले देश के साथ इजरायल का गठबंधन और अधिक प्रगति की दिशा में बढ़ने वाला है।
भारत और इजरायल: रणनीतिक दृष्टिकोण से एक नया मोड़
प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा उनके तीसरे कार्यकाल के दौरान होने वाला पहला दौरा होगा। यह यात्रा 2017 में किए गए मोदी के पहले ऐतिहासिक इजरायल दौरे के बाद एक और महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। उस समय दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबला करने के क्षेत्र में कड़ी साझेदारी देखने को मिली थी।
अब इस प्रस्तावित दौरे में खासतौर पर रक्षा प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में नए समझौतों की संभावना जताई जा रही है। इस यात्रा से पहले भारतीय प्रधानमंत्री 27-28 फरवरी को इजरायल पहुंचने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक तिथियों की घोषणा अभी नहीं हुई है।
नई तकनीक और रक्षा सहयोग में बदलाव की उम्मीदें
भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं। इजरायल भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली, ड्रोन तकनीक और मिसाइल प्रौद्योगिकी में सहायता प्रदान करता रहा है। इस आगामी दौरे में रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने की योजना है, खासकर सीमा सुरक्षा, रक्षा उत्पादन में संयुक्त निवेश और नई तकनीकियों को लेकर।
भारत-इजरायल संबंध: डिजिटल और नवाचार की दिशा में नई पहल
दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र अब डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बन चुका है। भारत में विशाल बाजार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन की उपलब्धता है, वहीं इजरायल को दुनिया का "स्टार्टअप नेशन" माना जाता है। इन दोनों देशों के बीच आने वाले समय में डिजिटल तकनीकी सहयोग और एआई क्षेत्र में कई नई साझेदारियों की संभावना है।
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