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महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य के एक प्रमुख इलाके का नाम बदलने का फैसला लिया है। राज्य के वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि महाराष्ट्र कैबिनेट ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है और अब इसे केंद्र सरकार को अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से बदले गए इलाके का आधिकारिक नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह नाम परिवर्तन लंबे समय से स्थानीय लोगों की मांग पर आधारित है। छगन भुजबल ने कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा, "हमने नाम बदलने का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया था, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया है। अब हम इसे केंद्र सरकार को भेजेंगे, ताकि वहां से अंतिम मुहर लगाई जा सके।"

राज्य में इससे पहले भी कई इलाकों, रेलवे स्टेशनों और शहरों के नाम बदले जा चुके हैं, जैसे कि औरंगाबाद को 'छत्रपति संभाजीनगर' और उस्मानाबाद को 'धाराशिव' किया गया था। यह ताजा नाम परिवर्तन भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

नाम बदलने की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी आवश्यक होती है। गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ही नया नाम आधिकारिक दस्तावेजों, नक्शों और संकेतकों में शामिल किया जाएगा।

इस फैसले पर स्थानीय जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोग इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान के पुनर्स्थापन के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को लगता है कि इससे प्रशासनिक असुविधा हो सकती है।

फिलहाल राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया में जुट गई है और जल्द ही औपचारिक घोषणा की उम्मीद की जा रही है।