Up kiran,Digital Desk : महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पार्टी ने कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के नामांकन में गड़बड़ी की। इस मामले की जांच राज्य निर्वाचन आयोग कर रहा है।
आयोग ने उन नगर निगमों और वार्डों की रिपोर्ट मांगी है जहां उनके उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कहीं विरोधियों पर दबाव, लालच या जबरदस्ती तो नहीं किया गया, जिससे उनके नामांकन वापस लेने पड़ गए।
निर्विरोध जीतने वाले सत्ताधारी उम्मीदवार
ठाणे जिले के कल्याण डोंबिवली नगर निगम: पांच भाजपा और चार शिवसेना उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।
पिंपरी चिंचवड़ (पुणे), जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर: कम से कम एक भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया।
इस तरह, कई सत्ताधारी उम्मीदवारों के खिलाफ कोई प्रतिद्वंदी नहीं था।
राज्य निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया
एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें शिकायतें मिली हैं कि सत्ताधारी पार्टी और चुनाव मशीनरी ने कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने में बाधा डाली।
कांग्रेस, जनता दल (एस) और आप ने आरोप लगाया कि मुंबई के कोलाबा क्षेत्र के तीन वार्डों में उन्हें दबाव में गैरकानूनी तरीके से नामांकन दाखिल करने से रोका गया।
आयोग अब उन वार्डों के रिटर्निंग अधिकारियों, नगर आयुक्त और संबंधित पुलिस आयुक्तों से रिपोर्ट मांग रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्विरोध जीत के लिए किसी तरह की अनियमितता या दबाव तो नहीं बनाया गया।
राज्य की 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को चुनाव होने हैं, और आयोग की यह जांच चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




