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Up kiran,Digital Desk : बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी और नालंदा से लगातार 9 बार के विधायक श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में जदयू विधायक दल का नेता नियुक्त किया है।

यह निर्णय सोमवार को पटना में हुई विधायक दल की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें नीतीश कुमार को नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया था।

श्रवण कुमार ही क्यों? समझें सियासी समीकरण

नीतीश कुमार द्वारा श्रवण कुमार को यह कमान सौंपने के पीछे कई गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं:

लव-कुश समीकरण को साधना: नीतीश कुमार की राजनीति का आधार 'कुर्मी-कुशवाहा' (लव-कुश) वोट बैंक रहा है। नीतीश खुद कुर्मी जाति से हैं और श्रवण कुमार भी इसी समाज के बड़े नेता हैं। चूंकि नई सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में एक भूमिहार (विजय चौधरी) और एक यादव (बिजेंद्र यादव) को जगह मिली, अतः अपनी मूल ताकत 'कुर्मी' समाज को जोड़े रखने के लिए यह फैसला लिया गया।

अटूट विश्वसनीयता: श्रवण कुमार 1995 से अब तक कभी चुनाव नहीं हारे हैं। समता पार्टी के दौर से लेकर अब तक वह नीतीश कुमार के साथ साये की तरह खड़े रहे हैं।

अनुभव का लाभ: ग्रामीण विकास, परिवहन और समाज कल्याण जैसे विभागों के मंत्री रह चुके श्रवण कुमार को संसदीय प्रक्रियाओं और संगठन का गहरा अनुभव है।

नालंदा का वो किला, जिसे 31 साल से कोई नहीं भेद पाया

श्रवण कुमार की राजनीतिक यात्रा संघर्ष और निरंतरता की मिसाल है:

जेपी आंदोलन की उपज: उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जेपी आंदोलन से की थी।

9 बार के विधायक: 1995 में पहली बार समता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद से वह लगातार 31 साल से नालंदा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

2025 की बड़ी जीत: पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार को 33,000 से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।

सम्राट सरकार में बढ़ी भूमिका और सुरक्षा

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने और राज्यसभा जाने के बाद, अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में श्रवण कुमार की भूमिका और बढ़ गई है।

सुरक्षा में इजाफा: हाल ही में राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ाकर वाई प्लस (Y+) श्रेणी कर दी है।

कैबिनेट विस्तार: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी कैबिनेट विस्तार में उन्हें एक बार फिर महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

श्रवण कुमार को पार्टी के अंदर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति की बारीकियां सिखाने और उन्हें सक्रिय करने वाले प्रमुख रणनीतिकारों में भी गिना जाता है।