Up Kiran, Digital Desk: अमेरिका की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी अब सिर्फ एक सुरक्षा सवाल नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट के अनुसार, अमेरिकी सरकार इस क्षेत्र पर कब्जे के लिए किसी भी कदम को उठाने के लिए तैयार है। यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पर नियंत्रण से अमेरिका न केवल आर्कटिक क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकानों को मजबूती दे सकता है, बल्कि यह रूस और चीन जैसी वैश्विक ताकतों की गतिविधियों पर भी निगरानी रख सकता है।
ग्रीनलैंड में जानें क्या है खास
ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व केवल इसके भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से भी भरपूर है। ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज (REEs) और अन्य महत्वपूर्ण खनिज जैसे यूरेनियम, लिथियम, कोबाल्ट, और निकेल पाए जाते हैं। इन संसाधनों से अमेरिका को चीन पर निर्भरता कम करने का मौका मिलेगा। साथ ही, ग्रीनलैंड में तेल और गैस के विशाल भंडार भी हैं, जो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका के लिए बेहद लाभकारी हो सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक क्षेत्र में नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जो यूरोप, एशिया और अमेरिका के बीच यात्रा को तेज और सस्ता बना सकते हैं। इन नए मार्गों का नियंत्रण किसी भी देश के लिए वैश्विक व्यापार में अहम स्थान प्राप्त करने का अवसर हो सकता है। ग्रीनलैंड का भौगोलिक स्थान इसे इन नए समुद्री मार्गों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना देता है। इस तरह अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार में रणनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए भी जरूरी हो सकता है।
स्पेस और सैटेलाइट नियंत्रण: ग्रीनलैंड की अहम भूमिका
इसके अलावा, ग्रीनलैंड का स्थान पोलर सैटेलाइट्स के ट्रैकिंग और कम्युनिकेशन के लिहाज से भी विशेष महत्व रखता है। यहां स्थित होने के कारण अमेरिका अपने अंतरिक्ष मिशनों, स्पेस वारफेयर और सर्विलांस क्षमता को और बेहतर बना सकता है। इसका मतलब है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से अमेरिका को न सिर्फ सैन्य शक्ति, बल्कि अंतरिक्ष से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरणों पर भी अधिक नियंत्रण मिल सकता है।
रूस और चीन पिछले कुछ वर्षों से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। रूस ने यहां सैन्य बेस और न्यूक्लियर आइसब्रेकर जैसी परियोजनाओं की शुरुआत की है, जबकि चीन ने माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा दिया है। अमेरिका के लिए यह खतरे की घंटी है, क्योंकि ये दोनों देश ग्रीनलैंड में अपनी मजबूत स्थिति बना सकते हैं, जो अमेरिका के लिए असुविधाजनक हो सकता है। ऐसे में अमेरिका का ग्रीनलैंड पर ध्यान केंद्रित करना उसकी रणनीतिक दृष्टि का हिस्सा माना जा सकता है।




