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Up Kiran, Digital Desk: यूके सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की योजना बनाई है। 2030 तक, वह अपनी शिक्षा एक्सपोर्ट्स को £40 बिलियन तक पहुंचाना चाहती है। वर्तमान में यह आंकड़ा £32 बिलियन है, जो ऑटोमोटिव और फूड-ड्रिंक उद्योग से भी ज्यादा है। इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि यूके की वैश्विक भागीदारी को बढ़ाना और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है।

ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज की बढ़ती पहुंच

ब्रिटेन की शिक्षा सचिव, ब्रिजेट फिलिपसन के अनुसार, अगर ब्रिटिश विश्वविद्यालय विदेशों में अपनी शाखाएं खोलते हैं, तो न सिर्फ विश्वविद्यालयों की आय बढ़ेगी, बल्कि यूके को वैश्विक संबंधों को और मज़बूती से स्थापित करने का मौका मिलेगा। इससे लाखों छात्रों को अपनी मातृभूमि में बैठकर यूके की विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा, जिससे देश में भी शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा।

भारत: यूके के लिए प्रमुख लक्ष्य

इंग्लैंड के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रमुख, प्रोफेसर सर स्टीव स्मिथ ने पांच देशों की सूची बनाई है, जिनमें भारत पहले स्थान पर है। भारत के अलावा, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, वियतनाम, और नाइजीरिया जैसे देशों को भी इस योजना में प्रमुख स्थान मिला है। ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली ने यह जानकारी दी कि भारत इसलिए अहम है क्योंकि यहां छात्रों की संख्या बहुत बड़ी है और भविष्य में 3 करोड़ नए छात्रों को जगह देने की आवश्यकता होगी। यूके, इस समस्या के समाधान में मदद करने के लिए तैयार है।

भारत में ब्रिटिश यूनिवर्सिटी कैंपस: छात्रों के लिए नई राह

भारत में शिक्षा के क्षेत्र में ब्रिटेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर के बीच एक अहम सहमति बनी है। इसके तहत, अगले कुछ सालों में नौ ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोलने जा रहे हैं। इससे भारतीय छात्रों को यूके की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा अपने ही देश में प्राप्त हो सकेगी, और साथ ही उन्हें विदेश जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।

भारतीय छात्रों के लिए लाभ

भारत में यूके यूनिवर्सिटी के कैंपस खुलने से छात्रों को कई फायदे होंगे:

कम खर्च में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा: विदेश जाने की बजाय घर बैठे ही छात्र यूके की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जो नौकरी में भी वैल्यू रखेगी।

कॉस्ट और ट्रैवल की बचत: वीज़ा, ट्रैवल और हॉस्टल जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। छात्र अपने परिवार के साथ रहकर पढ़ाई कर सकेंगे।

ग्लोबल स्किल्स और नेटवर्क: भारत में रहते हुए भी छात्र एक वैश्विक शिक्षा प्राप्त करेंगे, जिससे उन्हें इंटरनेशनल नेटवर्क और स्किल्स का लाभ मिलेगा।

भारत-यूके रिश्ते में मजबूती: दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से आने वाले समय में नौकरी और रिसर्च के नए अवसर खुलेंगे।