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Up Kiran, Digital Desk: क्या आप जानते हैं कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है? जी हाँ, यही वजह है कि हर भारतीय रसोई की थाली में हो या विदेशी होटल की मेज़ पर भारतीय प्याज अपनी तेज सुगंध और तीखे स्वाद से सबका दिल जीत लेता है। भारतीय प्याज की यही खासियत है कि यह साल के 12 महीने उपलब्ध रहता है।

दो फसलें, सालभर की सप्लाई

भारत में प्याज की खेती दो बड़े चक्रों में होती है।

पहली कटाई नवंबर से जनवरी तक होती है, जब बाजारों में ताज़ा लाल प्याज की भरमार होती है।

दूसरी कटाई जनवरी से मई तक आती है, और यही वजह है कि भारत कभी भी प्याज की कमी से नहीं जूझता।

गाँव-गाँव के खेतों में जब यह फसल लहलहाती है, तो किसानों के चेहरों पर चमक साफ दिखाई देती है। यही प्याज आगे जाकर दुनिया भर की थालियों तक पहुँचता है।

दुनिया भर में भारतीय प्याज की डिमांड

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के मुताबिक भारत से प्याज की सबसे ज्यादा खेप बांग्लादेश, मलेशिया, यूएई, श्रीलंका और नेपाल को जाती है। इनके अलावा कुवैत, इंडोनेशिया, मालदीव्स, ओमान और वियतनाम भी टॉप 10 आयातकों में आते हैं।

वित्त वर्ष 2024-25 में प्याज आयात (आँकड़ों में)

बांग्लादेश: 4.79 लाख टन प्याज मंगाया, जिसकी कीमत 204.45 मिलियन डॉलर, यानी लगभग आधी हिस्सेदारी सिर्फ इसी देश की।

मलेशिया: 1.70 लाख टन प्याज आयात किया, वैल्यू 66.78 मिलियन डॉलर।

यूएई: 1.33 लाख टन प्याज मंगाया, 11.38% हिस्सेदारी।

श्रीलंका और नेपाल भी बड़े खरीदार रहे।

यानी साफ है कि भारतीय प्याज पर दक्षिण एशिया से लेकर अरब देशों तक पूरी दुनिया की रसोई निर्भर है।

भारत के "ऑनियन बेल्ट" की कहानी

अब बात करते हैं उन राज्यों की, जो इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं।

महाराष्ट्र अकेले 35% उत्पादन के साथ पूरे देश का "ऑनियन किंग" बना हुआ है।

इसके बाद मध्य प्रदेश 17% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर आता है।

वहीं कर्नाटक, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और तेलंगाना भी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

सड़कों पर अगर आपने कभी नासिक या लासलगाँव के प्याज मंडियों का नज़ारा देखा हो तो समझ सकते हैं कि यहाँ का प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं बल्कि किसानों की जिंदगी और विदेशी बाजारों की धड़कन है।

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