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Up Kiran, Digital Desk: भारत और पोलैंड के बीच हालिया बैठक में भारत ने अपनी कूटनीतिक स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड को न केवल रूस के साथ व्यापारिक रिश्तों पर अपनी चिंताएं जताईं, बल्कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश दिया। जयशंकर ने पोलैंड को चेतावनी दी कि वे पाकिस्तान को किसी भी रूप में आतंकवाद के मामलों में मदद न करें। यह चेतावनी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को लगातार मजबूत कर रहा है।

पोलैंड ने आतंकवाद के खतरे को समझा
इस बैठक में पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की ने भारत की चिंताओं का समर्थन किया और आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को समझने की बात की। उन्होंने खुद भी आगजनी और राज्य-प्रायोजित हमलों का सामना किया है, इसलिए इस मुद्दे पर उनकी समझ गहरी है। सिकोर्स्की ने माना कि आतंकवाद से निपटने के लिए साझा प्रयास जरूरी हैं और उन्होंने भारत की नीति का समर्थन किया।

रूस-भारत व्यापार पर दबाव का विरोध
बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक भू-राजनीति पर भी गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत पर रूस से व्यापार करने के कारण दबाव डालना और खासतौर से टैरिफ लगाना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को लेकर किसी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। यह बयान भारत की स्थिति को मजबूती से पेश करता है, जो कि हमेशा से ही युद्ध के बजाय कूटनीति और संवाद के पक्ष में रहा है।

पोलैंड का रुख: भारत के साथ मजबूती से खड़ा है
पोलैंड ने भारत की बातों से पूरी सहमति जताई और स्पष्ट किया कि किसी भी देश को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना वैश्विक व्यापार के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सिकोर्स्की ने कहा कि पोलैंड ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में काफी संघर्ष किया है और वह इसे पूरी गंभीरता से लेता है। इसके अलावा, उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि का भी उल्लेख किया, जो अब 7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

भारत-पोलैंड के रिश्तों में मजबूती
भारत और पोलैंड के रिश्ते दिन-ब-दिन मजबूत होते जा रहे हैं। व्यापार के साथ-साथ, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी में भी वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में, पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक भारत के कूटनीतिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।