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Up Kiran, Digital Desk: तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का संकेत दिया है। पुतिन ने साफ कहा कि मॉस्को और बीजिंग का लक्ष्य ब्रिक्स को और मज़बूत करना है। उन्होंने मई में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूस यात्रा को “शानदार सफलता” बताते हुए इसे दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर करार दिया।

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ को दिए लिखित साक्षात्कार में पुतिन ने कहा, “जिनपिंग की हालिया यात्रा ने व्यापक अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया और इसका मास्को-बीजिंग रिश्तों पर गहरा प्रतीकात्मक असर पड़ा।”

‘शी जिनपिंग एक महान नेता’

पुतिन ने साक्षात्कार में जिनपिंग की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक “महान नेता” बताया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति दृढ़ इच्छाशक्ति और रणनीतिक दृष्टि से संपन्न हैं। पुतिन ने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों के इस नाज़ुक दौर में चीन के पास ऐसा नेतृत्व होना बेहद अहम है।

रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, शी न केवल आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं, बल्कि रूस के इतिहास और उसकी परंपराओं का गहरा सम्मान भी करते हैं।

विजय दिवस परेड में पुतिन की मौजूदगी

अपनी चीन यात्रा के दौरान पुतिन बीजिंग में आयोजित विजय दिवस परेड में भी शामिल होंगे, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता भाग लेने वाले हैं। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ को समर्पित है।

पुतिन ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ और चीन ने सबसे बड़ा खामियाज़ा झेला था, और उनके नागरिकों ने आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ाई में अपार बलिदान दिया। उन्होंने इसे रूस-चीन मित्रता और सहयोग की मज़बूत नींव करार दिया।

पुतिन ने याद दिलाया कि चीन का वीरतापूर्ण प्रतिरोध ही वह अहम कारण था, जिसने 1941-42 के सबसे कठिन दौर में जापान को सोवियत संघ पर हमला करने से रोके रखा।

ब्रिक्स और एससीओ पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि तियानजिन में होने वाला यह शिखर सम्मेलन न सिर्फ एससीओ देशों के बीच सुरक्षा और आर्थिक सहयोग की दिशा तय करेगा, बल्कि रूस-चीन धुरी को मज़बूत करने का भी संकेत देगा। पुतिन के बयानों से यह साफ है कि आने वाले समय में ब्रिक्स और एससीओ दोनों मंचों पर मॉस्को और बीजिंग का तालमेल और गहराएगा।

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