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Up kiran,Digital Desk : टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चला आ रहा कन्फ्यूजन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण संकेत देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए एक नया स्ट्रक्चर (New Structure) तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि इस नए ढांचे से टाटा संस जैसी बड़ी होल्डिंग कंपनियों के भविष्य का फैसला होगा।

लिस्टिंग की डेडलाइन खत्म, पर RBI का रुख नरम

आरबीआई के मौजूदा नियमों के मुताबिक, टाटा संस को 'अपर लेयर' एनबीएफसी के तौर पर पिछले साल 30 सितंबर तक शेयर बाजार में लिस्ट हो जाना चाहिए था। हालांकि, यह समयसीमा बीतने के बावजूद टाटा संस निजी बनी हुई है। टाटा संस को छोड़कर बाकी सभी संबंधित संस्थाओं ने इस नियम का पालन किया है। जब गवर्नर मल्होत्रा से टाटा संस की लिस्टिंग की अनिवार्यता पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने विस्तार से जानकारी देने के बजाय केवल इतना कहा कि "नया स्ट्रक्चर एनबीएफसी को श्रेणीबद्ध करेगा और इसे बहुत जल्द लाया जाएगा।"

आखिर क्यों लिस्टिंग से बच रहा है टाटा ग्रुप?

टाटा संस के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना एक बड़ी चुनौती है। लिस्टिंग के बाद कंपनी पर सेबी (SEBI) और आरबीआई के कड़े नियमों के तहत वित्तीय खुलासों का बोझ बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा ग्रुप का कारोबार नमक से लेकर सॉफ्टवेयर (TCS) तक फैला हुआ है, ऐसे में एक विविध कॉरपोरेट समूह के लिए इन जटिल शर्तों का पालन करना कठिन हो सकता है। टाटा संस अपनी प्राइवेट होल्डिंग संरचना को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, महंगाई पर नजर

लिस्टिंग विवाद के बीच आरबीआई ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy) में ब्याज दरों को लेकर 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपनाई है। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में चले तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी को देखते हुए आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। हालांकि, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध विराम की खबरों से बाजार में सकारात्मक सुधार की उम्मीद जगी है।

क्या होगा नया NBFC स्ट्रक्चर?

गवर्नर के बयान के बाद बाजार में चर्चा है कि नया ढांचा एनबीएफसी की श्रेणियों में कुछ बदलाव कर सकता है, जिससे टाटा संस जैसी निवेश कंपनियों को अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिल सकती है या नियमों में कुछ ढील दी जा सकती है। फिलहाल, पूरी इंडस्ट्री की नजर आरबीआई के आगामी ड्राफ्ट पर टिकी है।