Up Kiran, Digital Desk: बीमारियाँ जब भी चर्चा का विषय बनती हैं, तो अधिकांश लोग सामान्य समस्याओं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, माइग्रेन और कैंसर के बारे में सोचते हैं। लेकिन इसके अलावा भी ऐसी कुछ दुर्लभ बीमारियाँ हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये बीमारियाँ बहुत ही कम लोगों को प्रभावित करती हैं, लेकिन जब ये होती हैं, तो इनका प्रभाव गंभीर और जानलेवा हो सकता है। दुर्लभ बीमारियाँ न केवल चिकित्सा क्षेत्र में चुनौती प्रस्तुत करती हैं, बल्कि इनसे प्रभावित लोग और उनके परिवारों के लिए भी यह एक कठिन संघर्ष होता है।
दुर्लभ बीमारियाँ क्या होती हैं
दुर्लभ बीमारियाँ वे होती हैं जो बहुत सीमित आबादी में पाई जाती हैं। इन बीमारियों का इलाज ढूंढ पाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इनका निदान और उपचार सामान्य बीमारियों से अलग होता है। कई मामलों में, इन बीमारियों का इलाज अब तक खोजा नहीं जा सका है और मरीजों को उपचार के लिए विशेष चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है।
दुनियाभर की कुछ बेहद दुर्लभ बीमारियाँ
1. RPI डेफिशिएंसी (RPI Deficiency)
यह बीमारी दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारियों में से एक मानी जाती है। यह शरीर में एक विशेष एंजाइम की कमी के कारण होती है। इसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों में अकड़न, दौरे और दिमाग के सफेद हिस्से को नुकसान हो सकता है। अब तक इस बीमारी का केवल एक ही मामला देखा गया है।
2. फील्ड्स डिजीज (Fields Disease)
यह एक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है जिसमें मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। अब तक इस बीमारी के केवल दो मामले सामने आए हैं, और ये दोनों जुड़वा बहनों में पाए गए थे। इस बीमारी पर वैज्ञानिकों द्वारा शोध जारी है और इसकी प्रकृति अभी तक पूरी तरह से समझी नहीं जा सकी है।
3. हचिंसन-गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम (Hutchinson-Gilford Progeria Syndrome)
यह बीमारी बच्चों में वृद्धावस्था के लक्षण दिखाने वाली एक दुर्लभ स्थिति है। इसके कारण बच्चों में त्वचा पर झुर्रियाँ, बालों का गिरना और बुजुर्गों जैसी शारीरिक बनावट देखने को मिलती है। यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है और इसका कोई स्थिर इलाज उपलब्ध नहीं है।
4. मेथेमोग्लोबिनेमिया (Methemoglobinemia)
इस बीमारी में खून का रंग नीला दिखने लगता है, जिससे शरीर के अंग जैसे त्वचा, होंठ और नाखून नीले पड़ जाते हैं। यह बीमारी एक विशेष प्रकार के हीमोग्लोबिन की अधिकता के कारण होती है और इसकी पहचान करना भी मुश्किल होता है।
5. एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया (Aquagenic Urticaria)
पानी से होने वाली एलर्जी एक दुर्लभ स्थिति है, जिसे एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया कहते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर पर पानी के संपर्क में आने पर खुजली और लाल चकत्ते हो जाते हैं। पसीने, बारिश या बर्फ के संपर्क से भी यह समस्या बढ़ सकती है।
6. फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम (Foreign Accent Syndrome)
यह एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अचानक किसी विदेशी लहजे में बोलने लगता है। यह स्थिति अक्सर सिर या मस्तिष्क में चोट लगने के बाद देखी जाती है, और इसमें व्यक्ति अपनी सामान्य बोली को बदलकर एक अलग लहजा अपनाता है।
7. स्टोन मैन डिजीज (Stone Man Disease)
यह एक जटिल बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगती हैं। समय के साथ, शरीर जकड़ने लगता है, लेकिन दिल, आंखों और जीभ की मांसपेशियाँ इससे प्रभावित नहीं होतीं। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन कठिन हो जाता है, क्योंकि उनकी शारीरिक गतिविधियाँ सीमित हो जाती हैं।




