Up kiran,Digital Desk : वास्तु शास्त्र में दीवार घड़ी (wall clock) को सिर्फ समय दिखाने वाला साधन नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा‑धारा को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है। घड़ी सही दिशा और स्थान पर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और मानसिक संतुलन बढ़ने की मान्यता है, जबकि गलत दिशा में इसे रखने से रुकावटें और तनाव पैदा हो सकते हैं।
सबसे शुभ दिशा — कहां लगाएँ?
उत्तर दिशा – वास्तु के अनुसार यह दिशा कुबेर (धन के देवता) से जुड़ी है और घड़ी यहां लगाने से धन, समृद्धि और अवसरों में वृद्धि होती है।
पूर्व दिशा – यह सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा है। यहां घड़ी लगाने से नई शुरुआत और सकारात्मक सोच को लाभ मिलता है।
इन दोनों दिशाओं को घर के मुख्य कमरे, बैठक या ऑफिस में घड़ी लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
किन दिशाओं में घड़ी लगाने से बचें?
दक्षिण दिशा – इसे वास्तु में अशुभ माना जाता है। घड़ी यहां रखने से मंदी, बाधाएँ और मानसिक तनाव की संभावना बढ़ सकती है।
पश्चिम और दक्षिण‑पश्चिम दिशा – ये दिशाएँ ऊर्जा के अवरोध और उन्नति में देरी का कारण बन सकती हैं, इसलिए इन जगहों पर घड़ी लगाने से बचें।
मुख्य दरवाज़े के ऊपर – वास्तु के अनुसार इसे प्रवेश के समय सकारात्मक ऊर्जा के मार्ग को बंद कर दिया जाता है।
कुछ और वास्तु सुझाव
घड़ी सदस्य, मेहमान या घर के केंद्र में सीधे मुख्य दरवाज़े के सामने न लगाएँ।
घड़ी ठीक से काम करती हुई हो — बंद या टूटी हुई घड़ी नकारात्मकता का संकेत मानी जाती है।
बेडरूम में घड़ी लगाने से बचें या यदि लगानी हो तो सिर के ठीक सामने न रखें क्योंकि यह नींद और मानसिक शांति पर असर डाल सकता है।
घड़ी का आकार गोल और हल्के रंग का रखे — यह दृश्य रूप से भी सुकून और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
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