Up Kiran,Digital Desk: भारत सरकार ने रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 7 नए हाईस्पीड कॉरिडोर की योजना की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के विभिन्न हिस्सों के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनाना है। इनमें से दो कॉरिडोर खास तौर पर दिल्लीवासियों के लिए फायदेमंद होंगे। पहला दिल्ली से वाराणसी, और दूसरा वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का होगा। इन दोनों कॉरिडोरों का निर्माण अलग-अलग समय पर होगा, लेकिन अंततः ये एक दूसरे से जुड़ जाएंगे। इससे दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की यात्रा केवल 7 घंटों में पूरी की जा सकेगी, जो वर्तमान में लगभग 24 घंटे का समय लेती है।
वर्तमान रेलवे सेवा से तुलना
अब तक दिल्ली से वाराणसी का 800 किलोमीटर का सफर वंदेभारत एक्सप्रेस द्वारा 8 घंटे में तय किया जाता है। हालांकि, इस नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जिससे बुलेट ट्रेन केवल 3.5 घंटे में यह दूरी तय कर सकेगी। एयर ट्रैवल से तुलना करें तो विमान द्वारा यह दूरी लगभग 1 घंटे में तय होती है, लेकिन इसके लिए यात्रियों को एयरपोर्ट पर एक से डेढ़ घंटा पहले पहुंचना पड़ता है।
उत्तर-पूर्व के लिए अहम कनेक्टिविटी
दूसरी तरफ, वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच लगभग 700 किलोमीटर का नया हाईस्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के बन जाने से बुलेट ट्रेन इस दूरी को भी केवल 3.5 घंटे में पार कर लेगी। यह रेलमार्ग उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और यात्रियों के लिए समय की बहुत बचत करेगा। वर्तमान में इस यात्रा को पूरा करने में कई बार 24 घंटे से ज्यादा समय लगता है, लेकिन हाईस्पीड रेल के जरिए यह सफर एक तिहाई समय में पूरा होगा।
नए कॉरिडोर का भविष्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कॉरिडोर न केवल यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि यात्रियों के अनुभव को भी बेहतर करेगा। हालांकि, यात्रा के लिए किस स्टेशनों पर रुकावटें होंगी, यह बाद में तय किया जाएगा। इससे न केवल दिल्ली और उत्तर-पूर्व के बीच कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि यह पूरे देश की रेलवे यात्रा के अनुभव को भी नया आकार देगा।
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