Up Kiran, Digital Desk: केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि नया परिसीमन होने के बाद भी दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा सीटों का हिस्सा पहले जितना ही रहेगा। यानी आबादी के अंतर के बावजूद तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र और तेलंगाना को राजनीतिक नुकसान नहीं होगा। यह उनके लिए बड़ी राहत है क्योंकि पिछले कई साल से ये राज्य यही डर जता रहे थे कि जनसंख्या कम बढ़ाने की सजा उन्हें मिलेगी।
आबादी बढ़ी उत्तर में, सजा क्यों भुगतें दक्षिण वाले?
दक्षिण के नेता लंबे समय से कहते आए हैं कि उन्होंने परिवार नियोजन को गंभीरता से लिया। जन्म दर कम की। साक्षरता बढ़ाई। अब अगर सीटें सिर्फ आबादी के हिसाब से बांटी गईं तो यूपी-बिहार जैसे राज्य और ताकतवर हो जाएंगे। उनकी यह दलील अब सरकार ने मान ली है। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा सीटों का अनुपात फ्रीज रहेगा।
विधानसभा सीटें बढ़ेंगी, राज्यसभा नहीं छुएंगे
नए प्रस्ताव के तहत हर राज्य अपनी विधानसभा सीटें नई जनगणना के हिसाब से बढ़ा सकेगा। यह राज्य का अपना मामला माना जा रहा है। लेकिन राज्यसभा की सीटें वैसी ही रहेंगी। सरकार का तर्क है कि राज्यसभा राज्यों के बराबर प्रतिनिधित्व के लिए है। लोकसभा में जनसंख्या का खेल चल सकता है लेकिन ऊपरी सदन में सभी राज्य बराबर रहेंगे।
शहर बढ़े, गांव पीछे न छूटें
पिछले 23 साल में देश की शहरी आबादी तेजी से बढ़ी है। सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि परिसीमन में गांव का प्रतिनिधित्व कम न हो जाए। शहरी सीटें बढ़ेंगी लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों को भी उचित हिस्सा मिलेगा।
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