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Up kiran,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज को 'तीर्थराज' कहा जाता है, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का पावन संगम होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पवित्र नगरी के प्रधान देवता कौन हैं? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु 'वेणी माधव' के रूप में यहाँ विराजमान हैं और त्रेतायुग से इस नगर की रक्षा कर रहे हैं। यदि आप संगम स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे हैं, तो वेणी माधव मंदिर का दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है, अन्यथा आपकी तीर्थयात्रा अधूरी मानी जा सकती है।

त्रेतायुग से जुड़ा पौराणिक इतिहास

वेणी माधव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पद्म पुराण के अनुसार, जब राक्षस गजकर्ण के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त थे, तब भगवान विष्णु ने उसका संहार किया। त्रिवेणी जी की प्रार्थना पर भगवान ने इसी स्थान पर स्थायी निवास करने का वरदान दिया और 'वेणी माधव' कहलाए। उन्हें प्रयागराज का 'नगर देवता' और त्रिवेणी संगम का रक्षक माना जाता है।

शालिग्राम शिला से बनी दिव्य प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान वेणी माधव की प्रतिमा अद्भुत है:

स्वरूप: भगवान श्याम रंग की अत्यंत दुर्लभ काले शालिग्राम शिला से बने हैं।

आयुध: प्रतिमा के हाथों में शंख और चक्र सुशोभित हैं।

त्रिवेणी दर्शन: भगवान के साथ त्रिवेणी जी की भी दिव्य प्रतिमा स्थापित है।

अन्य नाम: इस मंदिर को 'लक्ष्मी नारायण मंदिर' और 'माधो सकल काम साधो' के नाम से भी श्रद्धापूर्वक पुकारा जाता है।

द्वादश माधव: प्रयाग के 12 रक्षक स्वरूप

प्रयागराज की सीमा के भीतर भगवान विष्णु कुल 12 स्वरूपों में विराजमान हैं, जिन्हें 'द्वादश माधव' कहा जाता है। वेणी माधव इन सभी में मुख्य पीठ हैं। अन्य 11 माधव स्वरूप इस प्रकार हैं:

क्रमांकमाधव का नाममहत्व
1वेणी माधवमुख्य पीठ और नगर देवता
2चक्र माधव14 महाविद्याओं के प्रतीक, ज्ञान प्रदाता
3गदा माधवशक्ति और सुरक्षा के प्रतीक
4पद्म माधवसमृद्धि और शांति के कारक
5अनंत माधवमोक्ष और अनंत काल के स्वामी
6बिंदु माधवएकाग्रता और भक्ति के केंद्र
7मनोहर माधवसुख और सौंदर्य के प्रदाता
8असि माधवबाधाओं का नाश करने वाले
9संकट हरण माधवदुखों और कष्टों को दूर करने वाले
10आदि वेणी माधवसृष्टि के आरंभिक रक्षक
11आदि वट माधवप्रलयकाल के साक्षी (मूल माधव)
12शंख माधवविजय और मंगल के प्रतीक

विशेष तिथियों पर उमड़ता है जनसैलाब

यूं तो यहाँ प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी, पूर्णिमा, एकादशी और अनंत चतुर्दशी पर यहाँ विशेष उत्सव मनाया जाता है। श्रद्धालु संगम में स्नान करने के बाद सबसे पहले वेणी माधव के दर्शन को दौड़ते हैं।

मान्यता: "माधो सकल काम साधो" यानी माधव के दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और भक्तों की हर जायज मनोकामना पूर्ण होती है।