Up Kiran, Digital Desk: हमारे जीवन में धर्म और कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। खासकर हिंदू धर्मग्रंथों में इन दोनों को जीवन की दिशा और उद्देश्य के रूप में माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता, मनुस्मृति और गरुड़ पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी के मेहनत की कमाई को छीनना या उसका हक मारना गंभीर पाप है। हालांकि, आज के भौतिकवादी युग में लोग थोड़े से लाभ के लिए दूसरों को धोखा देने से नहीं चूकते। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, पराया धन कभी सुख नहीं दे सकता। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार इस प्रकार की कमाई के परिणाम और उसकी सजा के बारे में।
अन्याय से कमाए गए धन का क्या हश्र होता है?
चाणक्य नीति और अन्य शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी तरह से धोखाधड़ी से कमाया गया धन ज्यादा समय तक नहीं टिकता। एक प्रसिद्ध श्लोक में यह कहा गया है:
"अन्यायोपार्जितं वित्तं दश वर्षाणि तिष्ठति। प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद् विनश्यति।।"
इसका मतलब है कि जो धन किसी ने अन्याय से कमाया है, वह दस वर्षों तक तो टिक सकता है, लेकिन ग्यारहवें वर्ष आते-आते वह पूरी तरह नष्ट हो जाता है। यानी गलत तरीके से आया धन न केवल समाप्त होता है, बल्कि उस व्यक्ति की अपनी मेहनत की कमाई भी इसके साथ चली जाती है।
गरुड़ पुराण में अन्याय के परिणाम
गरुड़ पुराण में यमलोक और वहां मिलने वाली यातनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। जो लोग दूसरों की संपत्ति पर कब्जा करते हैं या किसी की मेहनत से कमाया हुआ धन हड़पते हैं, उन्हें विभिन्न गंभीर सजाएं दी जाती हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार:
रौरव नरक: जो लोग अपने परिवार का पालन करने के नाम पर दूसरों का हक मारते हैं, उन्हें रौरव नरक में भेजा जाता है। यहां उन्हें सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के काटने की यातनाएं दी जाती हैं।
खौलते तेल में डालना: जो लोग किसी की मेहनत से कमाई गई राशि को धोखा देकर छीनते हैं, उन्हें खौलते हुए तेल में डाला जाता है, जो कि एक भयानक सजा मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यह धन परलोक में आग के समान कष्ट देता है।
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