
Income Tax Slab: नया कर वर्ष हर वर्ष एक अप्रैल को शुरू होता है। हर महीने की शुरुआत देश में एक बड़े आर्थिक बदलाव के साथ होती है। कल से वित्तीय लेन-देन से जुड़ी कई चीजें बदल जाएंगी। आपके रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत से लेकर आपके बैंक खाते तक सब कुछ प्रभावित होगा।
हर महीने की पहली तारीख को तेल और गैस वितरण कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं। ऐसे में लोगों को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में राहत भरे बदलाव की उम्मीद है। सीएनजी की कीमत में भी उतार-चढ़ाव की संभावना है।
एक अप्रैल 2025 से क्रेडिट कार्ड के नियम भी बदल गए हैं। इससे उन पर मिलने वाले रिवॉर्ड और अन्य लाभ प्रभावित होंगे। एसबीआई अपने सिम्पलीक्लिक क्रेडिट कार्ड पर स्विगी रिवॉर्ड्स को 5 गुना से घटाकर आधा करने जा रहा है। एयर इंडिया के सिग्नेचर प्वाइंट 30 से घटकर 10 रह जाएंगे। इसके अलावा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक भी क्लब विस्तारा माइलस्टोन लाभ बंद करने जा रहा है।
1 अप्रैल से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) समेत कई बैंक ग्राहकों के बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि के नियमों में संशोधन करेंगे। बैंक खाताधारक के लिए न्यूनतम शेष राशि के लिए नई क्षेत्रवार सीमाएं निर्धारित करेगा तथा खाते में न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
एक अप्रैल से मोबाइल नंबर से जुड़े यूपीआई खाते लंबे समय से बंद रहने पर बैंक रिकॉर्ड से हटा दिए जाएंगे। यदि आपका फोन नंबर UPI ऐप से लिंक है और आपने लंबे समय से इसका उपयोग नहीं किया है, तो इसकी सेवा अक्षम हो सकती है।
नए टैक्स स्लैब के तहत 12 लाख रुपये प्रति वर्ष तक की आय को कर-मुक्त कर दिया गया है। इसका मतलब ये है कि अब 12.75 लाख रुपये तक की वेतन आय पर कर से छूट मिलेगी। हालाँकि, ये छूट केवल उन लोगों पर लागू होगी जो नया कर विकल्प चुनते हैं।
इसके अतिरिक्त, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नियमों को भी अपडेट किया गया है और अनावश्यक कटौतियों को कम करने तथा करदाताओं के लिए नकदी प्रवाह में सुधार लाने के लिए अलग अलग धाराओं में सीमाएं बढ़ा दी गई हैं। उदाहरण के लिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा बढ़ गई है। इसी प्रकार, किराए की आय पर छूट की सीमा बढ़ाकर 6 लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी गई है, जिससे मकान मालिकों पर बोझ कम हो गया है और शहरी क्षेत्रों में किराये के बाजार को बढ़ावा मिल सकता है।
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